बालकाण्ड

अध्याय 126: नारद के आगे कामदेव की हार

5 श्लोक · 126 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

नारद के आगे कामदेव की हार

कामदेव जब उस आश्रम में पहुँचा, तब उसने अपनी माया से वसन्त ऋतु रच दी। अनेक रंगों के वृक्ष फूलों से लद गए, कोयलें कूकने लगीं और भौंरे गुंजार करने लगे। शीतल, मन्द, सुगन्धित पवन चलने लगा, जो काम की अग्नि को भड़काता था। रम्भा आदि नवयुवती अप्सराएँ, जो कामकला में निपुण थीं, तानों की लहरें भरकर गाने लगीं और हाथों में गेंद लेकर खेलने लगीं। सहायकों को देखकर कामदेव प्रसन्न हुआ और उसने और भी अनेक प्रपंच रचे। परन्तु उसकी कोई भी कला मुनि पर नहीं चली, और पापी कामदेव अपने ही लिए डर गया। जिसके रखवाले स्वयं लक्ष्मीपति हों, उसकी सीमा कौन दबा सकता है? हार मानकर कामदेव सहायकों सहित भयभीत होकर मुनि के चरणों में गिर पड़ा और दीन वचन कहने लगा।

126.1

तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ । निज मायाँ बसन्त निरमयऊ ॥
कुसुमित बिबिध बिटप बहु रङ्गा । कूजहिँ कोकिल गुञ्जहिँ भृङ्गा ॥

tehi āśramahiṃ madana jaba gayaū | nija māyām̐ basanta niramayaū ||
kusumita bibidha biṭapa bahu raṅgā | kūjahim̐ kokila guñjahim̐ bhṛṅgā ||

126.2

चली सुहावनि त्रिबिध बयारी । काम-कृसानु बढ़ावनि हारी ॥
रम्भादिक सुर-नारि नबीना । सकल असमसर-कला-प्रबीना ॥

calī suhāvani tribidha bayārī | kāma-kṛsānu bar̤hāvani hārī ||
rambhādika sura-nāri nabīnā | sakala asamasara-kalā-prabīnā ||

126.3

करहिँ गान बहु तान तरङ्गा । बहु बिधि क्रीड़हिँ पानि-पतङ्गा ॥
देखि सहाय मदन हरषाना । कीन्हेसि पुनि प्रपञ्च विधि नाना ॥

karahim̐ gāna bahu tāna taraṅgā | bahu bidhi krīr̤ahim̐ pāni-pataṅgā ||
dekhi sahāya madana haraṣānā | kīnhesi puni prapañca vidhi nānā ||

126.4

काम-कला कछु मुनिहिँ न ब्यापी । निज-भयं डरेउ मनोभव पापी ॥
सीम कि चाँपि सकइ कोउ तासु । बड़ रखवार रमापति जासू ॥

kāma-kalā kachu munihim̐ na byāpī | nija-bhayaṃ ḍareu manobhava pāpī ||
sīma ki cām̐pi sakai kou tāsu | bar̤a rakhavāra ramāpati jāsū ||

दो॰ 126दोहा

सहित सहाय सभीत अति, मानि हारि मन मैन ।
गहेसि जाइ मुनि चरन तब, कहिं सुठि आरत बैन ॥

sahita sahāya sabhīta ati, māni hāri mana maina |
gahesi jāi muni carana taba, kahiṃ suṭhi ārata baina ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0