भयउ न नारद मन कछु रोषा । कहि प्रिय बचन काम परितोषा ॥
नाइ चरन सिर आयसु पाई । गयउ मदन तव सहित सहाई ॥
bhayau na nārada mana kachu roṣā | kahi priya bacana kāma paritoṣā ||
nāi carana sira āyasu pāī | gayau madana tava sahita sahāī ||
5 श्लोक · 127 में से 361
नारद के मन में तनिक भी क्रोध नहीं हुआ। उन्होंने प्रिय वचन कहकर कामदेव को सन्तुष्ट किया, और वह चरणों में सिर नवाकर, आज्ञा पाकर सहायकों सहित चला गया। इन्द्र की सभा में जाकर उसने मुनि की सुशीलता और अपनी करनी सब कह सुनाई। सब चकित हुए और मुनि की प्रशंसा करके हरि को सिर नवाया। तब नारद शिवजी के पास गए। मन में काम को जीतने का अहंकार था, और उन्होंने सारा चरित शंकर को सुनाया। महेश ने उन्हें अत्यन्त प्रिय जानकर सिखाया कि मैं बार बार विनती करता हूँ, जैसे यह कथा मुझे सुनाई, वैसे हरि को कभी मत सुनाना, प्रसंग चले तो भी छिपा जाना। शम्भु ने हित का उपदेश दिया, पर नारद को वह अच्छा नहीं लगा। याज्ञवल्क्य कहते हैं, हरि की इच्छा बलवान है।
भयउ न नारद मन कछु रोषा । कहि प्रिय बचन काम परितोषा ॥
नाइ चरन सिर आयसु पाई । गयउ मदन तव सहित सहाई ॥
bhayau na nārada mana kachu roṣā | kahi priya bacana kāma paritoṣā ||
nāi carana sira āyasu pāī | gayau madana tava sahita sahāī ||
मुनि सुसीलता आपनि करनी । सुरपति-सभाँ जाइ सब बरनी ॥
सुनि सब कें मन अचरज आवा । मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिर नावा ॥
muni susīlatā āpani karanī | surapati-sabhām̐ jāi saba baranī ||
suni saba keṃ mana acaraja āvā | munihi prasaṃsi harihi sira nāvā ||
तव नारद गवने सिव पाहीँ । जिता काम अहमिति मन माहीँ ॥
मार चरित सङ्करहिँ सुनाये । अति प्रिय जानि महेस सिखाये ॥
tava nārada gavane siva pāhīm̐ | jitā kāma ahamiti mana māhīm̐ ||
māra carita saṅkarahim̐ sunāye | ati priya jāni mahesa sikhāye ||
बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं । जिमि यह कथा सुनायहु मोहीँ ॥
तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ । चलेहुँ प्रसङ्ग दुराएडु तबहूँ ॥
bāra bāra binavaum̐ muni tohīṃ | jimi yaha kathā sunāyahu mohīm̐ ||
timi jani harihi sunāvahu kabahūm̐ | calehum̐ prasaṅga durāeḍu tabahūm̐ ||
सम्भु दीन्ह उपदेस हित, नहिँ नारदहि सोहान ।
भारद्वाज कौतुक सुनहु, हरि-इच्छा बलवान ॥
sambhu dīnha upadesa hita, nahim̐ nāradahi sohāna |
bhāradvāja kautuka sunahu, hari-icchā balavāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0