बालकाण्ड

अध्याय 123: जलन्धर और उसकी पत्नी का व्रत

5 श्लोक · 123 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

जलन्धर और उसकी पत्नी का व्रत

भगवान के हाथ मरकर भी जय और विजय मुक्त नहीं हुए, क्योंकि ब्राह्मण के वचन से उन्हें तीन जन्म लेने थे। उन्हीं के लिए भक्तवत्सल प्रभु ने एक बार शरीर धारण किया। वहाँ कश्यप और अदिति उनके पिता माता थे, जो दशरथ और कौसल्या के नाम से विख्यात हुए। प्रभु ने इस प्रकार अवतार लेकर संसार को पावन किया। एक दूसरे कल्प में सब देवता जलन्धर से युद्ध में हार गए। शिवजी ने उससे अपार युद्ध किया, पर वह महाबली दानव मारे नहीं मरता था, क्योंकि उसकी पत्नी परम सती थी और उसी के बल से वह बचा रहता था। तब प्रभु ने छल से उसका व्रत भंग किया और देवताओं का काम किया। जब उसने यह भेद जाना, तब क्रोध करके प्रभु को शाप दे दिया।

123.1

मुकुत न भये हते भगवाना । तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना ॥
एक बार तिन्ह के हित लागी । धरेउ सरीर भगत अनुरागी ॥

mukuta na bhaye hate bhagavānā | tīni janama dvija bacana pravānā ||
eka bāra tinha ke hita lāgī | dhareu sarīra bhagata anurāgī ||

123.2

कस्यप अदिति तहाँ पितु माता । दसरथ कौसल्या बिख्याता ॥
एक कलप एहि बिधि अवतारा । चरित्र पवित्र किये संसारा ॥

kasyapa aditi tahām̐ pitu mātā | dasaratha kausalyā bikhyātā ||
eka kalapa ehi bidhi avatārā | caritra pavitra kiye saṃsārā ||

123.3

एक कलप सुर देखि दुखारे । समर जलन्धर सन सब हारे ॥
सम्भु कीन्ह संग्राम अपारा । दनुज महाबल मरइ न मारा ॥

eka kalapa sura dekhi dukhāre | samara jalandhara sana saba hāre ||
sambhu kīnha saṃgrāma apārā | danuja mahābala marai na mārā ||

123.4

परम-सती असुराधिप-नारी । तेहि बल ताहि न जितहिँ पुरारी ॥

parama-satī asurādhipa-nārī | tehi bala tāhi na jitahim̐ purārī ||

दो॰ 123दोहा

छल करि टारेउ तासु ब्रत, प्रभु सुर कारज कीन्ह ।
जब तेहि जानेउँ मरम तब, श्राप कोप करि दीन्ह ॥

chala kari ṭāreu tāsu brata, prabhu sura kāraja kīnha |
jaba tehi jāneum̐ marama taba, śrāpa kopa kari dīnha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0