तासु साप हरि कीन्ह प्रमाना । कौतुक-निधि कृपाल भगवाना ॥
तहाँ जलन्धर रावन भयऊ । रन हति राम परम-पद दयऊ ॥
tāsu sāpa hari kīnha pramānā | kautuka-nidhi kṛpāla bhagavānā ||
tahām̐ jalandhara rāvana bhayaū | rana hati rāma parama-pada dayaū ||
6 श्लोक · 124 में से 361
कौतुकनिधि कृपालु भगवान ने उस शाप को प्रमाण माना। वही जलन्धर रावण हुआ, जिसे श्रीराम ने युद्ध में मारकर परमपद दिया। एक जन्म का कारण यह था, शिवजी कहते हैं कि एक बार नारद ने भी प्रभु को शाप दिया था और उसी के लिए एक कल्प में अवतार हुआ। यह सुनकर गिरिजा चकित हुईं। नारद तो विष्णु के भक्त और ज्ञानी हैं, फिर उन्होंने शाप क्यों दिया, रमापति ने कौन सा अपराध किया था? वे शिवजी से मुनि के इस मोह का प्रसंग पूछती हैं। महेश हँसकर बोले कि संसार में कोई अपने आप ज्ञानी या मूढ़ नहीं होता, रघुपति जिसे जब जैसा करते हैं, वह उसी क्षण वैसा हो जाता है। तुलसीदास कहते हैं, मान मद छोड़कर रघुनाथ को भजो।
तासु साप हरि कीन्ह प्रमाना । कौतुक-निधि कृपाल भगवाना ॥
तहाँ जलन्धर रावन भयऊ । रन हति राम परम-पद दयऊ ॥
tāsu sāpa hari kīnha pramānā | kautuka-nidhi kṛpāla bhagavānā ||
tahām̐ jalandhara rāvana bhayaū | rana hati rāma parama-pada dayaū ||
एक जनम कर कारन एहा । जेहि लागि राम धरी नर-देहा ॥
प्रति अवतार कथा प्रभु केरी । सुनु मुनि बरनी कबिन्ह घनेरी ॥
eka janama kara kārana ehā | jehi lāgi rāma dharī nara-dehā ||
prati avatāra kathā prabhu kerī | sunu muni baranī kabinha ghanerī ||
नारद साप दीन्ह एक बारा । कलप एक तेहि लगि अवतारा ॥
गिरिजा चकित भई सुनि बानी । नारद बिष्नु भगत पुनि ज्ञानी ॥
nārada sāpa dīnha eka bārā | kalapa eka tehi lagi avatārā ||
girijā cakita bhaī suni bānī | nārada biṣnu bhagata puni jñānī ||
कारन कवन साप मुनि दीन्हा । का अपराध रमापति कीन्हा ॥
यह प्रसङ्ग मोहि कहहु पुरारी । मुनि मन मोह आचरज भारी ॥
kārana kavana sāpa muni dīnhā | kā aparādha ramāpati kīnhā ||
yaha prasaṅga mohi kahahu purārī | muni mana moha ācaraja bhārī ||
बोले बिहँसि महेस तब, ज्ञानी मूढ़ न कोइ ।
जेहि जस रघुपति करहिँ जब, सो तस तेहि छन होइ ॥
bole biham̐si mahesa taba, jñānī mūr̤ha na koi |
jehi jasa raghupati karahim̐ jaba, so tasa tehi chana hoi ||
कहउँ राम-गुन गाथ, भरद्वाज सादर सुनहु ।
भव भज्जन रघुनाथ, भजु तुलसी तजि मान मद ॥
kahaum̐ rāma-guna gātha, bharadvāja sādara sunahu |
bhava bhajjana raghunātha, bhaju tulasī taji māna mada ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0