बालकाण्ड

अध्याय 119: पार्वती का संशय मिटा

5 श्लोक · 119 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

पार्वती का संशय मिटा

शिव बोले, काशी में मरते हुए जीव को देखकर मैं जिनके नाम के बल से उसे शोकरहित कर देता हूँ, वही मेरे प्रभु, चराचर के स्वामी, सबके हृदय के अन्तर्यामी रघुवर हैं। जो मनुष्य आदर से उनका स्मरण करते हैं, वे संसार सागर को गाय के खुर जितना मानकर पार कर जाते हैं। हे भवानी, वही परमात्मा श्रीराम हैं, उनके विषय में तुम्हारी भ्रम भरी वाणी अत्यन्त अनुचित थी। हृदय में ऐसा संशय लाते ही ज्ञान, वैराग्य और सब गुण चले जाते हैं। शिव के भ्रम नाशक वचन सुनकर पार्वती के कुतर्क की सारी रचना मिट गई। रघुपति के चरणों में प्रीति और विश्वास हुआ, और कठिन असम्भावना दूर हो गई। चरण पकड़कर गिरिजा प्रेमरस में सनी सुन्दर वाणी बोलीं।

119.1

कासीं मरत जन्तु अवलोकी । जासु नाम बल करउँ बिसोकी ॥
सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी । रघुबर सब उर अन्तरजामी ॥

kāsīṃ marata jantu avalokī | jāsu nāma bala karaum̐ bisokī ||
soi prabhu mora carācara svāmī | raghubara saba ura antarajāmī ||

119.2

बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीँ । जनम अनेक रचित अघ दहहीँ ॥
सादर सुमिरन जे नर करहीँ । भव-बारिधि गो-पद इव तरहीँ ॥

bibasahum̐ jāsu nāma nara kahahīm̐ | janama aneka racita agha dahahīm̐ ||
sādara sumirana je nara karahīm̐ | bhava-bāridhi go-pada iva tarahīm̐ ||

119.3

राम सो परमातमा भवानी । तहँ भ्रम अति अबिहित तब बानी ॥
अस संसय आनत उर माहीँ । ज्ञान विराग सकल गुन जाहीँ ॥

rāma so paramātamā bhavānī | taham̐ bhrama ati abihita taba bānī ||
asa saṃsaya ānata ura māhīm̐ | jñāna virāga sakala guna jāhīm̐ ||

119.4

सुनि सिव के सम-भञ्जन-बचना । मिटि गइ सब कुतरक कै रचना ॥
भइ रघुपति-पद प्रीति प्रतीती । दारुन असम्भावना बीती ॥

suni siva ke sama-bhañjana-bacanā | miṭi gai saba kutaraka kai racanā ||
bhai raghupati-pada prīti pratītī | dāruna asambhāvanā bītī ||

दो॰ 119दोहा

पुनि पुनि प्रभु-पद कमल गहि, जोरि पङ्करुह पानि ।
बोली गिरिजा बचन बर, मनहुँ प्रेम रस सानि ॥

puni puni prabhu-pada kamala gahi, jori paṅkaruha pāni |
bolī girijā bacana bara, manahum̐ prema rasa sāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0