बालकाण्ड

अध्याय 116: सगुण और निर्गुण में भेद नहीं

5 श्लोक · 116 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सगुण और निर्गुण में भेद नहीं

शिव बोले, सगुण और निर्गुण में कुछ भेद नहीं, ऐसा मुनि, पुराण, पण्डित और वेद गाते हैं। जो निर्गुण, अरूप, अलख और अजन्मा है, वही भक्तों के प्रेम के वश सगुण हो जाता है। जो गुणरहित है, वह सगुण कैसे? जैसे जल, बर्फ और ओले अलग नहीं। जिसका नाम भ्रम रूपी अन्धकार के लिए सूर्य है, उसके लिए मोह की बात कैसे कही जाए? श्रीराम सच्चिदानन्द सूर्य हैं, वहाँ मोह रूपी रात्रि का लेश भी नहीं। हर्ष, शोक, ज्ञान, अज्ञान, अहंता और अभिमान, ये जीव के धर्म हैं। श्रीराम व्यापक ब्रह्म, परमानन्दस्वरूप, परमेश्वर और पुराणपुरुष हैं, यह जगत जानता है। जो प्रसिद्ध पुरुष, प्रकाश के भण्डार और सबके स्वामी हैं, वही रघुकुलमणि मेरे स्वामी हैं, ऐसा कहकर शिव ने सिर नवाया।

116.1

सगुनहिँ अगुनहिँ नहिँ कछु भेदा । गावहिँ मुनि पुरान बुध वेदा ॥
अगुन अरूप अलख अज जोई । भगत-प्रेम-बस सगुन सो होई ॥

sagunahim̐ agunahim̐ nahim̐ kachu bhedā | gāvahim̐ muni purāna budha vedā ||
aguna arūpa alakha aja joī | bhagata-prema-basa saguna so hoī ||

116.2

जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें । जल-हिम-उपल बिलग नहिँ जैसें ॥
जासु नाम भ्रम-तिमिर-पतङ्गा । तेहि किमि कहिय बिमोह प्रसङ्गा ॥

jo guna rahita saguna soi kaiseṃ | jala-hima-upala bilaga nahim̐ jaiseṃ ||
jāsu nāma bhrama-timira-pataṅgā | tehi kimi kahiya bimoha prasaṅgā ||

116.3

राम सच्चिदानन्द दिनेसा । नहिँ तहँ मोह-निसा-लवलेसा ॥
सहज प्रकास-रूप भगवाना । नहिँ तहँ पुनि बिज्ञान बिहाना ॥

rāma saccidānanda dinesā | nahim̐ taham̐ moha-nisā-lavalesā ||
sahaja prakāsa-rūpa bhagavānā | nahim̐ taham̐ puni bijñāna bihānā ||

116.4

हरष बिषाद ज्ञान अज्ञाना । जीव-धरम अहमिति अभिमाना ॥
राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना । परमानन्द परेस पुराना ॥

haraṣa biṣāda jñāna ajñānā | jīva-dharama ahamiti abhimānā ||
rāma brahma byāpaka jaga jānā | paramānanda paresa purānā ||

दो॰ 116दोहा

पुरुष-प्रसिद्ध प्रकास-निधि, प्रगट परावर-नाथ ।
रघुकुल-मनि मम स्वामि सोइ, कहि सिवँ नायउ माथ ॥

puruṣa-prasiddha prakāsa-nidhi, pragaṭa parāvara-nātha |
raghukula-mani mama svāmi soi, kahi sivam̐ nāyau mātha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0