बालकाण्ड

अध्याय 115: वेदविरुद्ध बोलने वालों की दशा

5 श्लोक · 115 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

वेदविरुद्ध बोलने वालों की दशा

शिव ऐसे लोगों का वर्णन करते हैं। वे अज्ञानी, अपण्डित, अन्धे और अभागे हैं, जिनके मन रूपी दर्पण पर विषयों की काई जमी है। वे वेदविरुद्ध वाणी बोलते हैं, जिन्हें लाभ हानि नहीं सूझती। दर्पण मैला और आँखें नहीं, तो वे दीन श्रीराम का रूप कैसे देखें? जिन्हें न निर्गुण का विवेक है न सगुण का, वे अनेक कल्पित बातें बकते हैं। हरि की माया के वश जगत में भटकते हैं, उनके लिए कुछ भी कह देना असम्भव नहीं। वायुरोगी, भूतग्रस्त और मतवाले विचारकर नहीं बोलते। जिन्होंने महामोह की मदिरा पी है, उनकी बात पर कान नहीं देना चाहिए। हे गिरिराजकुमारी, अपने हृदय में ऐसा विचारकर संशय छोड़ो और श्रीराम के चरणों का भजन करो। मेरे वचन भ्रम रूपी अन्धकार के लिए सूर्य की किरणें हैं।

115.1

अज्ञ अकोबिद अन्ध अभागी । काई बिषय मुकुर-मन लागी ॥
लम्पट कपटी कुटिल बिसेखी । सपनेहुँ सन्त-सभा नहिँ देखी ॥

ajña akobida andha abhāgī | kāī biṣaya mukura-mana lāgī ||
lampaṭa kapaṭī kuṭila bisekhī | sapanehum̐ santa-sabhā nahim̐ dekhī ||

115.2

कहहिँ ते बेद असंमत बानी । जिन्हहिँ कें सूझ लाभ नहिँ हानी ॥
मुकुर मलिन अरु नयन बिहीना । राम-रूप देखहिँ किमि दीना ॥

kahahim̐ te beda asaṃmata bānī | jinhahim̐ keṃ sūjha lābha nahim̐ hānī ||
mukura malina aru nayana bihīnā | rāma-rūpa dekhahim̐ kimi dīnā ||

115.3

जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका । जल्पहिँ कल्पित बचन अनेका ॥
हरि-माया-बस जगत भ्रमाहीँ । तिन्हहिँ कहत कछु अघटित नाहीँ ॥

jinha keṃ aguna na saguna bibekā | jalpahim̐ kalpita bacana anekā ||
hari-māyā-basa jagata bhramāhīm̐ | tinhahim̐ kahata kachu aghaṭita nāhīm̐ ||

115.4

बातुल भूत-बिबस मतवारे । ते नहिँ बोलहिँ बचन बिचारे ॥
जिन्ह कृत महा-मोह-मद पाना । तिन्ह कर कहा करिय नहिँ काना ॥

bātula bhūta-bibasa matavāre | te nahim̐ bolahim̐ bacana bicāre ||
jinha kṛta mahā-moha-mada pānā | tinha kara kahā kariya nahim̐ kānā ||

115.सो॰ 115सोरठा

अस निज हृदयँ बिचारि, तजु संसय भजु राम-पद ।
सुनु गिरिराज-कुमारि, भ्रम-तम रबि-कर-बचन-मम ॥

asa nija hṛdayam̐ bicāri, taju saṃsaya bhaju rāma-pada |
sunu girirāja-kumāri, bhrama-tama rabi-kara-bacana-mama ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0