रामकथा सुन्दर कर तारी । संसय-बिहग उड़ावनिहारी ॥
रामकथा कलि-बिटप कुठारी । सादर सुनु गिरिराज-कुमारी ॥
rāmakathā sundara kara tārī | saṃsaya-bihaga ur̤āvanihārī ||
rāmakathā kali-biṭapa kuṭhārī | sādara sunu girirāja-kumārī ||
5 श्लोक · 114 में से 361
शिव बोले, रामकथा सुन्दर ताली है जो सन्देह रूपी पक्षियों को उड़ा देती है। रामकथा कलियुग रूपी वृक्ष के लिए कुल्हाड़ी है, हे गिरिराजकुमारी, आदर से सुनो। जैसे श्रीराम अनन्त हैं, वैसे ही उनकी कथा और गुण अनन्त हैं। फिर भी तुम्हारी बड़ी प्रीति देखकर जैसा सुना है और जैसी मेरी बुद्धि है, वैसा कहूँगा। हे उमा, तुम्हारा प्रश्न सहज सुन्दर। पर हे भवानी, एक बात मुझे अच्छी न लगी, यद्यपि तुमने मोह के वश कही, कि जिन श्रीराम को वेद गाते हैं और मुनि ध्यान धरते हैं, वे कोई और हैं। ऐसा तो वे अधम मनुष्य कहते सुनते हैं जिन्हें मोह रूपी पिशाच ने ग्रस लिया है, जो पाखण्डी, हरिचरणों से विमुख हैं और झूठ सच नहीं जानते।
रामकथा सुन्दर कर तारी । संसय-बिहग उड़ावनिहारी ॥
रामकथा कलि-बिटप कुठारी । सादर सुनु गिरिराज-कुमारी ॥
rāmakathā sundara kara tārī | saṃsaya-bihaga ur̤āvanihārī ||
rāmakathā kali-biṭapa kuṭhārī | sādara sunu girirāja-kumārī ||
राम नाम गुन चरित सुहाये । जनम करम अगनित श्रुति गाये ॥
जथा अनन्त राम भगवाना । तथा कथा कीरति गुन नाना ॥
rāma nāma guna carita suhāye | janama karama aganita śruti gāye ||
jathā ananta rāma bhagavānā | tathā kathā kīrati guna nānā ||
तदपि जथा-सुत जसि मति मोरी । कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी ॥
उमा प्रस्न तब सहज सुहाई । सुखद सन्त सम्मत माहि भाई ॥
tadapi jathā-suta jasi mati morī | kahihaum̐ dekhi prīti ati torī ||
umā prasna taba sahaja suhāī | sukhada santa sammata māhi bhāī ||
एक बात नहिँ मोहि सोहानी । जदपि मोह-बस कहेहु भवानी ॥
तुम जो कहा राम कोउ आना । जेहि श्रुति गाव धरहिँ मुनि ध्याना ॥
eka bāta nahim̐ mohi sohānī | jadapi moha-basa kahehu bhavānī ||
tuma jo kahā rāma kou ānā | jehi śruti gāva dharahim̐ muni dhyānā ||
कहहिँ सुनहिँ अस अधम नर, ग्रसे जे मोह पिसाच ।
पाखंडी हरि-पद-बिमुख, जानहिँ झूठ न साच ॥
kahahim̐ sunahim̐ asa adhama nara, grase je moha pisāca |
pākhaṃḍī hari-pada-bimukha, jānahim̐ jhūṭha na sāca ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0