बालकाण्ड

अध्याय 111: कथा से पहले शिव का रामध्यान

5 श्लोक · 111 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कथा से पहले शिव का रामध्यान

पार्वती बोलीं, हे प्रभु, फिर उस तत्त्व का वर्णन कीजिए जिसके विज्ञान में ज्ञानी मुनि मग्न रहते हैं। भक्ति, ज्ञान, विज्ञान और वैराग्य को उनके विभागों सहित कहिए। हे निर्मल विवेक वाले नाथ, श्रीराम के और भी अनेक रहस्य कहिए। जो मैंने न पूछा हो, हे दयालु, उसे भी न छिपाइए। उमा के सहज सुन्दर और छलरहित प्रश्न सुनकर शिव के मन को बहुत भाए। हर के हृदय में सारे रामचरित आ गए, प्रेम से शरीर पुलकित हुआ और नेत्रों में जल भर आया। श्रीरघुनाथ का रूप हृदय में आया, जिससे परमानन्द और अपार सुख मिला। दो घड़ी तक शिव ध्यान के रस में डूबे रहे, फिर मन को बाहर लाए और हर्षित होकर रघुपति का चरित कहने लगे।

111.1

पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी । जेहिं बिज्ञान मगन मुनि ग्यानी ॥
भगति ज्ञान बिज्ञान बिरागा । पुनि सब बरनहु सहित बिभागा ॥

puni prabhu kahahu so tatva bakhānī | jehiṃ bijñāna magana muni gyānī ||
bhagati jñāna bijñāna birāgā | puni saba baranahu sahita bibhāgā ||

111.2

औरउ राम-रहस्य अनेका । कहहु नाथ अति बिमल बिबेका ॥
जो प्रभु मैँ पूछा नहिँ होई । सोउ दयाल राखहु जनि गोई ॥

aurau rāma-rahasya anekā | kahahu nātha ati bimala bibekā ||
jo prabhu maim̐ pūchā nahim̐ hoī | sou dayāla rākhahu jani goī ||

111.3

तुम्ह त्रिभुवन गुरु बेद बखाना । आन जीव पाँवर का जाना ॥
प्रस्न उमा कै सहज सुहाई । छल बिहीन सुनि सिव मन भाई ॥

tumha tribhuvana guru beda bakhānā | āna jīva pām̐vara kā jānā ||
prasna umā kai sahaja suhāī | chala bihīna suni siva mana bhāī ||

111.4

हर हियँ राम-चरित सब आये । प्रेम पुलक लोचन जल छाये ॥
श्रीरघुनाथ-रूप उर आवा । परमानन्द अमित सुख पावा ॥

hara hiyam̐ rāma-carita saba āye | prema pulaka locana jala chāye ||
śrīraghunātha-rūpa ura āvā | paramānanda amita sukha pāvā ||

दो॰ 111दोहा

मगन ध्यानरस दंड जुग, पुनि मन बाहेर कीन्ह ।
रघुपति-चरित महेस तब, हरषित बरनइ लीन्ह ॥

magana dhyānarasa daṃḍa juga, puni mana bāhera kīnha |
raghupati-carita mahesa taba, haraṣita baranai līnha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0