बालकाण्ड

अध्याय 112: बालरूप राम की वन्दना, उमा की प्रशंसा

5 श्लोक · 112 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

बालरूप राम की वन्दना, उमा की प्रशंसा

शिव बोले, जिसे जाने बिना झूठ भी सच लगता है, जैसे पहचाने बिना रस्सी साँप लगती है, और जिसे जान लेने पर जगत ऐसे खो जाता है जैसे जागने पर सपने का भ्रम मिट जाता है, उन्हीं बालरूप श्रीराम की मैं वन्दना करता हूँ। दशरथ के आँगन में खेलने वाले वे प्रभु मुझ पर कृपा करें। श्रीराम को प्रणाम करके त्रिपुरारि हर्षित होकर अमृत जैसी वाणी बोले, हे गिरिराजकुमारी, तुम धन्य हो, धन्य हो, तुम्हारे समान कोई उपकारी नहीं। तुमने रघुपति की वह कथा पूछी है जो सब लोकों को पवित्र करने वाली गंगा है। हे पार्वती, मेरे विचार में श्रीराम की कृपा से तुम्हारे मन में सपने में भी शोक, मोह, सन्देह और भ्रम नहीं है।

112.1

झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें । जिमि भुजङ्ग बिनु रजु पहिचानें ॥
जेहि जानें जग जाइ हेराई । जागें जथा सपन भ्रम जाई ॥

jhūṭheu satya jāhi binu jāneṃ | jimi bhujaṅga binu raju pahicāneṃ ||
jehi jāneṃ jaga jāi herāī | jāgeṃ jathā sapana bhrama jāī ||

112.2

बन्दउँ बाल-रूप सोइ रामू । सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू ॥
मङ्गल-भवन अमङ्गल-हारी । द्रवउ सो दसरथ अजिर-बिहारी ॥

bandaum̐ bāla-rūpa soi rāmū | saba sidhi sulabha japata jisu nāmū ||
maṅgala-bhavana amaṅgala-hārī | dravau so dasaratha ajira-bihārī ||

112.3

करि प्रनाम रामहिँ त्रिपुरारी । हरषि सुधा सम गिरा उचारी ॥
धन्य धन्य गिरिराज-कुमारी । तुम्ह समान नहिँ कोउ उपकारी ॥

kari pranāma rāmahim̐ tripurārī | haraṣi sudhā sama girā ucārī ||
dhanya dhanya girirāja-kumārī | tumha samāna nahim̐ kou upakārī ||

112.4

पूँछेहु रघुपति-कथा प्रसङ्गा । सकल-लोक जग-पावनि गङ्गा ॥
तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी । कीन्हहु प्रस्न जगत-हित लागी ॥

pūm̐chehu raghupati-kathā prasaṅgā | sakala-loka jaga-pāvani gaṅgā ||
tumha raghubīra carana anurāgī | kīnhahu prasna jagata-hita lāgī ||

दो॰ 112दोहा

रामकृपा तेँ पारबति, सपनेहुँ तब मन माहिँ ।
सोक मोह सन्देह भ्रम, मम बिचार कछु नाहिँ ॥

rāmakṛpā tem̐ pārabati, sapanehum̐ taba mana māhim̐ |
soka moha sandeha bhrama, mama bicāra kachu nāhim̐ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0