बालकाण्ड

अध्याय 110: सम्पूर्ण रामकथा की जिज्ञासा

5 श्लोक · 110 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सम्पूर्ण रामकथा की जिज्ञासा

पार्वती बोलीं, यद्यपि स्त्री इसकी अधिकारिणी नहीं, फिर भी मैं मन, वचन और कर्म से आपकी दासी हूँ। जहाँ आर्त अधिकारी मिलता है, वहाँ सन्त गूढ़ तत्त्व भी नहीं छिपाते। हे देवराज, मैं अत्यन्त आर्त होकर पूछती हूँ, दया करके रघुपति की कथा कहिए। पहले विचारकर वह कारण कहिए जिससे निर्गुण ब्रह्म सगुण शरीर धारण करता है। फिर श्रीराम का अवतार और उनकी उदार बाललीला कहिए। जिस प्रकार जानकी से विवाह हुआ, और राज्य छोड़ा तो किसके दोष से, यह कहिए। वन में रहकर जो अपार चरित किए और जैसे रावण को मारा, वह कहिए। हे सुशील शंकर, राजसिंहासन पर बैठकर जो बहुत सी लीलाएँ कीं, वे सब कहिए। फिर हे करुणाधाम, श्रीराम ने जो अचरज किया, और रघुवंशमणि प्रजा सहित अपने धाम कैसे गए, वह भी कहिए।

110.1

जदपि जोषिता नहिँ अधिकारी । दासी मन क्रम बचन तुम्हारी ॥
गूढउ तत्व न साधु दुरावहिँ । आरत अधिकारी जहँ पावहिँ ॥

jadapi joṣitā nahim̐ adhikārī | dāsī mana krama bacana tumhārī ||
gūḍhau tatva na sādhu durāvahim̐ | ārata adhikārī jaham̐ pāvahim̐ ||

110.2

अति आरति पूछउँ सुरराया । रघुपति कथा कहहु करि दाया ॥
प्रथम सो कारन कहहु बिचारी । निर्गुन-ब्रह्म सगुन-बपु-धारी ॥

ati ārati pūchaum̐ surarāyā | raghupati kathā kahahu kari dāyā ||
prathama so kārana kahahu bicārī | nirguna-brahma saguna-bapu-dhārī ||

110.3

पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा । बालचरित पुनि कहहु उदारा ॥
कहहु जथा जानकी बिबाहीं । राज तजा सो दूषन काहीं ॥

puni prabhu kahahu rāma avatārā | bālacarita puni kahahu udārā ||
kahahu jathā jānakī bibāhīṃ | rāja tajā so dūṣana kāhīṃ ||

110.4

बन बसि कीन्हे चरित अपारा । कहहु नाथ जिमि रावन मारा ॥
राज बैठि कीन्हीँ बहु लीला । सकल कहहु सङ्कर सुभ-सीला ॥

bana basi kīnhe carita apārā | kahahu nātha jimi rāvana mārā ||
rāja baiṭhi kīnhīm̐ bahu līlā | sakala kahahu saṅkara subha-sīlā ||

दो॰ 110दोहा

बहुरि कहहु करुनायतन, कीन्ह जो अचरज राम ।
प्रजा सहित रघुबंस-मनि, किमि गवने निज-धाम ॥

bahuri kahahu karunāyatana, kīnha jo acaraja rāma |
prajā sahita raghubaṃsa-mani, kimi gavane nija-dhāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0