बालकाण्ड

अध्याय 109: पार्वती का पिछले भ्रम का स्वीकार

5 श्लोक · 109 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

पार्वती का पिछले भ्रम का स्वीकार

पार्वती बोलीं, यदि कोई इच्छारहित, व्यापक और समर्थ ईश्वर है, तो हे नाथ, मुझे समझाकर कहिए। मैंने वन में श्रीराम की प्रभुता देखी थी, पर बहुत डर के कारण आपको नहीं बताया। फिर भी मेरे मलिन मन को बोध न हुआ, उसका फल मैंने भली भाँति पा लिया। अब भी मेरे मन में कुछ संशय है, हाथ जोड़कर विनती करती हूँ, कृपा कीजिए। अब वैसा मोह नहीं है, मन में रामकथा के प्रति रुचि है। हे सर्पराज भूषण, हे देवनाथ, श्रीराम के पवित्र गुणों की कथा कहिए। धरती पर सिर रखकर चरणों की वन्दना करती हूँ और हाथ जोड़कर विनती करती हूँ कि वेदों का सार निचोड़कर रघुवर का निर्मल यश वर्णन कीजिए।

109.1

जौँ अनीह व्यापक बिभु कोऊ । कहहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ ॥
अज्ञ जानि रिस उर जनि धरहू । जेहि विधि मोह मिटइ सोइ करहू ॥

jaum̐ anīha vyāpaka bibhu koū | kahahu bujhāi nātha mohi soū ||
ajña jāni risa ura jani dharahū | jehi vidhi moha miṭai soi karahū ||

109.2

मैँ बन दीख राम प्रभुताई । अति-भय-विकल न तुम्हहिँ सुनाई ॥
तदपि मलिन मन बोधु न आवा । सो फल भली भाँति हम पावा ॥

maim̐ bana dīkha rāma prabhutāī | ati-bhaya-vikala na tumhahim̐ sunāī ||
tadapi malina mana bodhu na āvā | so phala bhalī bhām̐ti hama pāvā ||

109.3

अजहूँ कछु संसय मन मोरे । करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें ॥
प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा । नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा ॥

ajahūm̐ kachu saṃsaya mana more | karahu kṛpā binavaum̐ kara joreṃ ||
prabhu taba mohi bahu bhām̐ti prabodhā | nātha so samujhi karahu jani krodhā ||

109.4

तब कर अस बिमोह अब नाहीँ । राम-कथा पर रुचि मन माहीँ ॥
कहहु पुनीत राम-गुन-गाथा । भुजगराज-भूषन सुर-नाथा ॥

taba kara asa bimoha aba nāhīm̐ | rāma-kathā para ruci mana māhīm̐ ||
kahahu punīta rāma-guna-gāthā | bhujagarāja-bhūṣana sura-nāthā ||

दो॰ 109दोहा

बन्दउँ पद धरि धरनि सिर, विनय करउँ कर जोरि ।
बरनहु रघुबर-बिसद-जस, स्त्रुति-सिद्धान्त निचोरि ॥

bandaum̐ pada dhari dharani sira, vinaya karaum̐ kara jori |
baranahu raghubara-bisada-jasa, struti-siddhānta nicori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0