बालकाण्ड

अध्याय 106: कैलास के वटवृक्ष तले शिव

5 श्लोक · 106 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कैलास के वटवृक्ष तले शिव

जो हरि और हर से विमुख हैं और जिनकी धर्म में प्रीति नहीं, वे सपने में भी कैलास नहीं पहुँचते। उस पर्वत पर एक विशाल वटवृक्ष है जो सब ऋतुओं में नित्य नया और सुन्दर रहता है। वेदों ने उसे शिव का विश्रामवृक्ष कहा है। एक बार प्रभु उस वृक्ष के नीचे गए और अपने हाथ से बाघम्बर बिछाकर कृपालु शम्भु सहज भाव से बैठ गए। उनका शरीर कुन्द, चन्द्रमा और शंख जैसा गोरा है, भुजाएँ लम्बी हैं और मुनियों जैसा वल्कल पहने हैं। नखों की ज्योति भक्तों के हृदय का अन्धकार हरती है। सर्प और भस्म उनके आभूषण हैं, मुख शरद के चन्द्रमा की छवि को हरता है। जटामुकुट में गंगा, नीला कण्ठ और ललाट पर बालचन्द्र शोभित हैं।

106.1

हरि-हर-विमुख धरम रति नाहीँ । ते नर तहँ सपनेहुँ नहिँ जाहीँ ॥
तेहि गिरि पर बट बिटप विसाला । नित नूतन सुन्दर सब काला ॥

hari-hara-vimukha dharama rati nāhīm̐ | te nara taham̐ sapanehum̐ nahim̐ jāhīm̐ ||
tehi giri para baṭa biṭapa visālā | nita nūtana sundara saba kālā ||

106.2

त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया । सिव-बिस्राम बिटप स्रुति गाया ॥
एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ । तरु बिलोकि उर अति सुख भयऊ ॥

tribidha samīra susītali chāyā | siva-bisrāma biṭapa sruti gāyā ||
eka bāra tehi tara prabhu gayaū | taru biloki ura ati sukha bhayaū ||

106.3

निज कर डासि नाग-रिपु-छाला । बैठे सहजहिँ सम्भु कृपाला ॥
कुन्द-इन्दु-दर गौर सरीरा । भुज-प्रलम्ब परिधन-मुनि-चीरा ॥

nija kara ḍāsi nāga-ripu-chālā | baiṭhe sahajahim̐ sambhu kṛpālā ||
kunda-indu-dara gaura sarīrā | bhuja-pralamba paridhana-muni-cīrā ||

106.4

तरुन-अरुन-अम्बुज सम चरना । नख-दुति भगत-हृदय-तम-हरना ॥
भुजग-भूति-भूषन त्रिपुरारी । आनन सरद-चन्द-छवि हारी ॥

taruna-aruna-ambuja sama caranā | nakha-duti bhagata-hṛdaya-tama-haranā ||
bhujaga-bhūti-bhūṣana tripurārī | ānana sarada-canda-chavi hārī ||

दो॰ 106दोहा

जटा-मुकुट-सुरसरित सिर, लोचन नलिन बिसाल ।
नीलकंठ लावन्यनिधि, सोह बाल-बिधु-भाल ॥

jaṭā-mukuṭa-surasarita sira, locana nalina bisāla |
nīlakaṃṭha lāvanyanidhi, soha bāla-bidhu-bhāla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0