बैठे सोह कामरिपु कैसें । धरें सरीर सान्त-रस जैसें ॥
पारबती भल अवसर जानी । गई सम्भु पहिँ मातु भवानी ॥
baiṭhe soha kāmaripu kaiseṃ | dhareṃ sarīra sānta-rasa jaiseṃ ||
pārabatī bhala avasara jānī | gaī sambhu pahim̐ mātu bhavānī ||
5 श्लोक · 107 में से 361
कामदेव के शत्रु शिव वहाँ ऐसे बैठे शोभित हैं मानो शान्तरस ही शरीर धरकर बैठा हो। अच्छा अवसर जानकर माता भवानी शम्भु के पास गईं। अपनी प्रिया जानकर शिव ने उनका बहुत आदर किया और बाईं ओर आसन दिया। पार्वती हर्षित होकर शिव के पास बैठीं, उन्हें पिछले जन्म की कथा याद आई। पति के हृदय में अपने प्रति अधिक स्नेह जानकर उमा मुसकाकर कोमल वाणी में बोलीं। जो कथा सब लोकों का हित करने वाली है, वही शैलकुमारी पूछना चाहती हैं। हे विश्वनाथ, हे मेरे नाथ, हे पुरारि, आपकी महिमा तीनों लोकों में विदित है। चर, अचर, नाग, मनुष्य और देवता सब आपके चरणकमलों की सेवा करते हैं। आपका नाम शरणागतों के लिए कल्पवृक्ष है।
बैठे सोह कामरिपु कैसें । धरें सरीर सान्त-रस जैसें ॥
पारबती भल अवसर जानी । गई सम्भु पहिँ मातु भवानी ॥
baiṭhe soha kāmaripu kaiseṃ | dhareṃ sarīra sānta-rasa jaiseṃ ||
pārabatī bhala avasara jānī | gaī sambhu pahim̐ mātu bhavānī ||
जानि प्रिया आदर अति कीन्हा । बाम-भाग आसन हर दीन्हा ॥
बैठीं सिव समीप हरषाई । पूरब-जनम-कथा चित आई ॥
jāni priyā ādara ati kīnhā | bāma-bhāga āsana hara dīnhā ||
baiṭhīṃ siva samīpa haraṣāī | pūraba-janama-kathā cita āī ||
पति-हियँ-हेतु अधिक मन मानी । बिहँसि उमा बोलीं मृदु बानी ॥
कथा जो सकल-लोक-हितकारी । सोइ पूछन चह सैल-कुमारी ॥
pati-hiyam̐-hetu adhika mana mānī | biham̐si umā bolīṃ mṛdu bānī ||
kathā jo sakala-loka-hitakārī | soi pūchana caha saila-kumārī ||
बिस्वनाथ मम-नाथ पुरारी । त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी ॥
चर अरु अचर नाग नर देवा । सकल करहिँ पद-पङ्कज-सेवा ॥
bisvanātha mama-nātha purārī | tribhuvana mahimā bidita tumhārī ||
cara aru acara nāga nara devā | sakala karahim̐ pada-paṅkaja-sevā ||
प्रभु समरथ सरबज्ञ सिव, सकल कला-गुन धाम ।
जोग-ज्ञान-बैराग्य-निधि, प्रनत-कलपतरु नाम ॥
prabhu samaratha sarabajña siva, sakala kalā-guna dhāma |
joga-jñāna-bairāgya-nidhi, pranata-kalapataru nāma ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0