तुरत भवन आये गिरिराई । सकल सैल सर लिये बोलाई ॥
आदर दान बिनय बहु माना । सब कर विदा कीन्ह हिमवाना ॥
turata bhavana āye girirāī | sakala saila sara liye bolāī ||
ādara dāna binaya bahu mānā | saba kara vidā kīnha himavānā ||
6 श्लोक · 103 में से 361
गिरिराज ने घर लौटकर सब पर्वतों और सरोवरों को आदर और दान सहित विदा किया। शम्भु कैलास पहुँचे और देवता अपने लोकों को गए। शम्भु और भवानी जगत के माता पिता हैं, इसलिए उनके श्रृंगार का वर्णन नहीं करता। वे गणों सहित कैलास पर रहने लगे, हर गिरिजा का विहार नित्य नया होता, और बहुत समय बीत गया। तब छह मुख वाले कुमार का जन्म हुआ, जिन्होंने युद्ध में तारकासुर को मारा। वेद और पुराणों में षडानन का जन्म और कर्म प्रसिद्ध है, इसलिए उनका चरित संक्षेप में कहा। जो नर नारी उमा शम्भु का यह विवाह कहेंगे और गाएँगे, वे मंगल कार्यों में सदा सुख पाएँगे। गिरिजापति के चरित्र का पार वेद भी नहीं पाते, तब मन्दबुद्धि तुलसीदास कैसे कहे?
तुरत भवन आये गिरिराई । सकल सैल सर लिये बोलाई ॥
आदर दान बिनय बहु माना । सब कर विदा कीन्ह हिमवाना ॥
turata bhavana āye girirāī | sakala saila sara liye bolāī ||
ādara dāna binaya bahu mānā | saba kara vidā kīnha himavānā ||
जबहिं सम्भु कैलासहिं आये । सुर सब निज निज लोक सिधाये ॥
जगत मातु-पितु सम्भु-भवानी । तेहि सिङ्गार न कहउँ बखानी ॥
jabahiṃ sambhu kailāsahiṃ āye | sura saba nija nija loka sidhāye ||
jagata mātu-pitu sambhu-bhavānī | tehi siṅgāra na kahaum̐ bakhānī ||
करहिँ बिबिध बिधि भोग बिलासा । गनन्ह समेत बसहिँ कैलासा ॥
हर-गिरिजा बिहार नित नयऊ । एहि विधि बिपुल काल चलि गयऊ ॥
karahim̐ bibidha bidhi bhoga bilāsā | gananha sameta basahim̐ kailāsā ||
hara-girijā bihāra nita nayaū | ehi vidhi bipula kāla cali gayaū ||
तब जनमेउ षट-बदन-कुमारा । तारक असुर समर जेहिं मारा ॥
आगम निगम प्रसिद्ध पुराना । षट-मुख जनम सकल जग जाना ॥
taba janameu ṣaṭa-badana-kumārā | tāraka asura samara jehiṃ mārā ||
āgama nigama prasiddha purānā | ṣaṭa-mukha janama sakala jaga jānā ||
जग जान षन्मुख जनम करम प्रताप पुरुषारथ महा ।
तेहि हेतु मैँ वृषकेतु-सुत कर, चरित संछेपहिं कहा ॥
यह उमा-सम्भु बिबाह जे नर, नारि कहहिँ जे गावहीँ ।
कल्यान काज बिबाह मङ्गल, सर्बदा सुख पावहीं ॥
jaga jāna ṣanmukha janama karama pratāpa puruṣāratha mahā |
tehi hetu maim̐ vṛṣaketu-suta kara, carita saṃchepahiṃ kahā ||
yaha umā-sambhu bibāha je nara, nāri kahahim̐ je gāvahīm̐ |
kalyāna kāja bibāha maṅgala, sarbadā sukha pāvahīṃ ||
चरित-सिन्धु गिरिजा रमन, बेद न पावहिँ पार ।
बरनइ तुलसीदास किमि, अति मति-मन्द गँवार ॥
carita-sindhu girijā ramana, beda na pāvahim̐ pāra |
baranai tulasīdāsa kimi, ati mati-manda gam̐vāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0