सम्भु चरित सुनि सरस सुहावा । भरद्वाज मुनि अति सुख पावा ॥
बहु लालसा कथा पर बाढ़ी । नयनन्हि-नीर रोमावलि ठाढ़ी ॥
sambhu carita suni sarasa suhāvā | bharadvāja muni ati sukha pāvā ||
bahu lālasā kathā para bār̤hī | nayananhi-nīra romāvali ṭhār̤hī ||
5 श्लोक · 104 में से 361
शम्भु का सुहावना चरित सुनकर भरद्वाज मुनि ने बहुत सुख पाया। कथा की लालसा बढ़ी, नेत्रों में जल भर आया, रोम खड़े हो गए और प्रेम के वश वाणी न निकली। यह दशा देखकर याज्ञवल्क्य हर्षित होकर बोले, हे मुनीश्वर, तुम्हारा जन्म धन्य है, तुम्हें गौरीपति प्राणों के समान प्रिय हैं। जिनकी शिव के चरणकमलों में प्रीति नहीं, वे श्रीराम को सपने में भी अच्छे नहीं लगते। विश्वनाथ के चरणों में निष्कपट प्रेम ही रामभक्त का लक्षण है। शिव के समान रघुपति का व्रत धारण करने वाला कौन है, जिन्होंने बिना पाप के सती जैसी स्त्री को त्याग दिया? शिव के समान श्रीराम को प्रिय कौन है? मैंने पहले शिवचरित कहकर तुम्हारा मन जान लिया, तुम श्रीराम के पवित्र और विकाररहित सेवक हो।
सम्भु चरित सुनि सरस सुहावा । भरद्वाज मुनि अति सुख पावा ॥
बहु लालसा कथा पर बाढ़ी । नयनन्हि-नीर रोमावलि ठाढ़ी ॥
sambhu carita suni sarasa suhāvā | bharadvāja muni ati sukha pāvā ||
bahu lālasā kathā para bār̤hī | nayananhi-nīra romāvali ṭhār̤hī ||
प्रेम बिबस मुख आव न बानी । दसा देखि हरषे मुनि-ज्ञानी ॥
अहो धन्य तब जनम मुनीसा । तुम्हहिँ प्रान सम प्रिय गौरीसा ॥
prema bibasa mukha āva na bānī | dasā dekhi haraṣe muni-jñānī ||
aho dhanya taba janama munīsā | tumhahim̐ prāna sama priya gaurīsā ||
सिव-पद-कमल जिन्हहिँ रति नाहीं । रामहिँ ते सपनेहुँ न सोहाहीं ॥
बिनु छल बिस्वनाथ-पद नेहू । राम भगत कर लच्छन एहू ॥
siva-pada-kamala jinhahim̐ rati nāhīṃ | rāmahim̐ te sapanehum̐ na sohāhīṃ ||
binu chala bisvanātha-pada nehū | rāma bhagata kara lacchana ehū ||
सिव सम को रघुपति-ब्रत-धारी । बिनु अघ तजी सती असि नारी ॥
पन करि रघुपति-भगति देखाई । को सिव सम रामहिँ प्रिय भाई ॥
siva sama ko raghupati-brata-dhārī | binu agha tajī satī asi nārī ||
pana kari raghupati-bhagati dekhāī | ko siva sama rāmahim̐ priya bhāī ||
प्रथमहिँ मै कहि मैँ सिव चरित, बूझा मरम तुम्हार ।
सुचि सेवक तुम्ह राम के, रहित समस्त बिकार ॥
prathamahim̐ mai kahi maim̐ siva carita, būjhā marama tumhāra |
suci sevaka tumha rāma ke, rahita samasta bikāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0