जसि बिबाह के बिधि श्रुति गाई । महामुनिन्ह सो सब करवाई ॥
गहि गिरीस कुस कन्या पानी । भवहि समरपीं जानि भवानी ॥
jasi bibāha ke bidhi śruti gāī | mahāmuninha so saba karavāī ||
gahi girīsa kusa kanyā pānī | bhavahi samarapīṃ jāni bhavānī ||
6 श्लोक · 101 में से 361
वेदों में विवाह की जो विधि कही गई है, महामुनियों ने वह सब कराई। गिरिराज ने हाथ में कुश और कन्या का हाथ लेकर उसे भवानी जानकर भव को समर्पित किया। महेश के पाणिग्रहण करते ही देवता हर्षित हुए, मुनि वेदमन्त्र पढ़ने लगे, बाजे बजे और फूल बरसे, सारे भुवनों में उत्साह भर गया। दास दासी, घोड़े, रथ, हाथी, गौएँ, वस्त्र, मणियाँ, अन्न और सोने के बर्तन, ऐसा दहेज दिया जिसका वर्णन नहीं हो सकता। फिर हाथ जोड़कर हिमवान बोले, हे शंकर, आप पूर्णकाम हैं, आपको क्या दूँ? और चरण पकड़े रहे। शिव ने ससुर को सब प्रकार सन्तुष्ट किया। फिर मैना ने चरण पकड़कर कहा, हे नाथ, उमा मुझे प्राणों से प्यारी है, इसे घर की दासी बनाइए, मेरे अपराध क्षमा कीजिए और यही वर दीजिए।
जसि बिबाह के बिधि श्रुति गाई । महामुनिन्ह सो सब करवाई ॥
गहि गिरीस कुस कन्या पानी । भवहि समरपीं जानि भवानी ॥
jasi bibāha ke bidhi śruti gāī | mahāmuninha so saba karavāī ||
gahi girīsa kusa kanyā pānī | bhavahi samarapīṃ jāni bhavānī ||
पानि-ग्रहन जब कीन्ह महेसा । हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा ॥
बेद मन्त्र मुनिबर उच्चरहीँ । जय जय जय सङ्कर सुर करहीँ ॥
pāni-grahana jaba kīnha mahesā | hiṃyam̐ haraṣe taba sakala suresā ||
beda mantra munibara uccarahīm̐ | jaya jaya jaya saṅkara sura karahīm̐ ||
बाजहिँ बाजन बिबिध बिधाना । सुमन बृष्टि नभ भइ बिधि नाना ॥
हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू । सकल भुवन भरि रहा उछाहू ॥
bājahim̐ bājana bibidha bidhānā | sumana bṛṣṭi nabha bhai bidhi nānā ||
hara girijā kara bhayau bibāhū | sakala bhuvana bhari rahā uchāhū ||
दासीं दास तुरग रथ नागा । धेनु बसन मनि बस्तु विभागा ॥
अन्न कनक-भाजन भरि जाना । दाइज दीन्ह न जाइ बखाना ॥
dāsīṃ dāsa turaga ratha nāgā | dhenu basana mani bastu vibhāgā ||
anna kanaka-bhājana bhari jānā | dāija dīnha na jāi bakhānā ||
दाइज दियो बहु भाँति पुनि कर,-जोरि हिम-भूधर कह्यो ।
का देउँ पूरनकाम सङ्कर, चरन-पङ्कज गहि रह्यो ॥
सिवँ कृपासागर ससुर का सन्तोष सब भाँतिहिं कियो ।
पुनि गहे पद-पाथोज मैना, प्रेम परिपूरन हियो ॥
dāija diyo bahu bhām̐ti puni kara,-jori hima-bhūdhara kahyo |
kā deum̐ pūranakāma saṅkara, carana-paṅkaja gahi rahyo ||
sivam̐ kṛpāsāgara sasura kā santoṣa saba bhām̐tihiṃ kiyo |
puni gahe pada-pāthoja mainā, prema paripūrana hiyo ||
नाथ उमा मम प्रान सम गृहकिंकरी करेहु ।
छमेहु सकल अपराध अब, होइ प्रसन्न बर देहु ॥
nātha umā mama prāna sama gṛhakiṃkarī karehu |
chamehu sakala aparādha aba, hoi prasanna bara dehu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0