एहि महँ रघुपति नाम उदारा । अति पावन पुरान-स्रुति-सारा ॥
मङ्गल-भवन अमङ्गल-हारी । उमा सहित जेहि जपत पुरारी ॥
ehi maham̐ raghupati nāma udārā | ati pāvana purāna-sruti-sārā ||
maṅgala-bhavana amaṅgala-hārī | umā sahita jehi japata purārī ||
8 श्लोक · 10 में से 361
वह एक गुण है रघुपति का उदार नाम, जो पुराण और श्रुति का सार है और जिसे शिव उमा सहित जपते हैं। श्रेष्ठ कविता भी राम नाम के बिना वैसे ही नहीं सोहती जैसे सजी हुई सुन्दर स्त्री वस्त्र के बिना। गुणहीन वाणी भी राम नाम से अंकित हो तो बुद्धिमान उसे आदर से सुनते हैं। इस कविता में रस नहीं, पर श्रीराम का प्रताप है, और अच्छे संग से सबकी बड़ाई होती है। छन्द कहता है कि टेढ़ी नदी गंगा से मिलकर पवित्र होती है, और श्मशान की भस्म शिव के अंग पर पावन। दोहे कहते हैं कि मलय के संग से चन्दन पूजा जाता है, और श्यामा गाय का दूध भी उजला और गुणकारी होता है।
एहि महँ रघुपति नाम उदारा । अति पावन पुरान-स्रुति-सारा ॥
मङ्गल-भवन अमङ्गल-हारी । उमा सहित जेहि जपत पुरारी ॥
ehi maham̐ raghupati nāma udārā | ati pāvana purāna-sruti-sārā ||
maṅgala-bhavana amaṅgala-hārī | umā sahita jehi japata purārī ||
भनिति बिचित्र सुकबि कृत जोऊ । राम नाम बिनु सोह न सोऊ ॥
बिधुबदनी सब भाँति सँवारी । सोह न बसन बिना बर नारी ॥
bhaniti bicitra sukabi kṛta joū | rāma nāma binu soha na soū ||
bidhubadanī saba bhām̐ti sam̐vārī | soha na basana binā bara nārī ||
सब गुन रहित कुकबि कृत बानी । राम नाम जस अङ्कित जानी ॥
सादर कहहिँ सुनहिँ बुध ताही । मधुकर सरिस सन्त गुन-ग्राही ॥
saba guna rahita kukabi kṛta bānī | rāma nāma jasa aṅkita jānī ||
sādara kahahim̐ sunahim̐ budha tāhī | madhukara sarisa santa guna-grāhī ||
जदपि कबित रस एकउ नाहीं । राम-प्रताप प्रगट एहि माहीं ॥
सोइ भरोस मोरें मन आवा । केहिं न सुसङ्ग बड़प्पन पावा ॥
jadapi kabita rasa ekau nāhīṃ | rāma-pratāpa pragaṭa ehi māhīṃ ||
soi bharosa moreṃ mana āvā | kehiṃ na susaṅga bar̤appana pāvā ||
धूमउ तजइ सहज करुआई । अगर प्रसङ्ग सुगन्ध बसाई ॥
भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी । राम-कथा जग-मङ्गल-करनी ॥
dhūmau tajai sahaja karuāī | agara prasaṅga sugandha basāī ||
bhaniti bhadesa bastu bhali baranī | rāma-kathā jaga-maṅgala-karanī ||
मङ्गल-करनि कलि मल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की ।
गति कूर कबिता-सरित की ज्योँ सरित-पावन-पाथ की ॥
प्रभु सुजस सङ्गति भनिति भलि होइहि सुजन मन-भावनी ।
भव-अङ्ग भूति मसान की सुमिरत सुहावनि पावनी ॥
maṅgala-karani kali mala harani tulasī kathā raghunātha kī |
gati kūra kabitā-sarita kī jyom̐ sarita-pāvana-pātha kī ||
prabhu sujasa saṅgati bhaniti bhali hoihi sujana mana-bhāvanī |
bhava-aṅga bhūti masāna kī sumirata suhāvani pāvanī ||
प्रिय लागिहि अति सबहि मम, भनिति राम-जस-सङ्ग ।
दारु बिचार कि करइ कोउ, बंदिअ मलय प्रसङ्ग ॥
priya lāgihi ati sabahi mama, bhaniti rāma-jasa-saṅga |
dāru bicāra ki karai kou, baṃdia malaya prasaṅga ||
स्याम-सुरभि-पय बिसद अति, गुनद-करहिं सब पान ।
गिरा ग्राम्य सिय-राम-जस, गावहिँ सुनहिँ सुजान ॥
syāma-surabhi-paya bisada ati, gunada-karahiṃ saba pāna |
girā grāmya siya-rāma-jasa, gāvahim̐ sunahim̐ sujāna ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0