अयोध्याकाण्ड

अध्याय 98: सीता, श्रीराम के बिना कहीं सुख नहीं

5 श्लोक · 98 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सीता, श्रीराम के बिना कहीं सुख नहीं

सीता आगे कहती हैं, मैंने पिता का वैभव देखा है, जिनकी चरण चौकी पर राजाओं के मणिमय मुकुट झुकते हैं, पर सुख का भण्डार वह घर भी प्रियतम के बिना मन को नहीं भाता। मेरे ससुर कोसलराज चक्रवर्ती हैं, चौदहों भुवनों में प्रसिद्ध, जिन्हें इन्द्र आगे बढ़कर आधे सिंहासन पर बैठाते हैं। ऐसे ससुर, अवध का निवास, प्रिय परिवार और माता समान सासें, पर रघुपति के चरणकमलों की धूल बिना इनमें से कोई सपने में भी सुख नहीं देता। कठिन मार्ग, पहाड़, हाथी, सिंह, नदियाँ, कोल, किरात, हिरन और पक्षी, प्राणपति के संग सब सुखदायी हैं। सास ससुर के पाँव पड़कर कहना कि मेरा सोच न करें, मैं वन में स्वभाव से सुखी हूँ।

98.1

पितु-बैभव-बिलास मैं डीठा । नृप-मनि-मुकुट मिलित पद पीठा ॥
सुख-निधान अस पितु-गृह मोरें । पिय बिहीन मन भाव न मारे ॥

pitu-baibhava-bilāsa maiṃ ḍīṭhā | nṛpa-mani-mukuṭa milita pada pīṭhā ||
sukha-nidhāna asa pitu-gṛha moreṃ | piya bihīna mana bhāva na māre ||

98.2

ससुर चक्कवइ कोसलराऊ । भुवन चारि-दस प्रगट प्रभाऊ ॥
आगें होइ जेहि सुरपति लेई । अरध सिंहासन आसन देई ॥

sasura cakkavai kosalarāū | bhuvana cāri-dasa pragaṭa prabhāū ||
āgeṃ hoi jehi surapati leī | aradha siṃhāsana āsana deī ||

98.3

ससुर एतादृस अवध निवासू । प्रिय परिवार मातु सम सासू ॥
बिनु रघुपति-पद-पदुम-परागा । मोहि कोउ सपनेहुँ सुखद न लागा ॥

sasura etādṛsa avadha nivāsū | priya parivāra mātu sama sāsū ||
binu raghupati-pada-paduma-parāgā | mohi kou sapanehum̐ sukhada na lāgā ||

98.4

अगम पन्थ बन भूमि पहारा । करि केहरि सर सरित अपारा ॥
कोल किरात कुरङ्ग बिहङ्गा । मोहि सब सुखद प्रानपति सङ्गा ॥

agama pantha bana bhūmi pahārā | kari kehari sara sarita apārā ||
kola kirāta kuraṅga bihaṅgā | mohi saba sukhada prānapati saṅgā ||

दो॰ 98दोहा

सासु ससुर सन मोरि हुँति, बिनय करबि परि पायँ ।
मोर सोचु जनि करिअ कछु, मैं बन सुखी सुभायँ ॥

sāsu sasura sana mori hum̐ti, binaya karabi pari pāyam̐ |
mora socu jani karia kachu, maiṃ bana sukhī subhāyam̐ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0