अयोध्याकाण्ड

अध्याय 97: सीता का उत्तर, छाया शरीर से अलग नहीं

5 श्लोक · 97 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सीता का उत्तर, छाया शरीर से अलग नहीं

राजा ने जिस आर्ति और प्रीति से विनती की, वह कही नहीं जाती। पिता का संदेश सुनकर श्रीराम ने सीता को अनेक प्रकार से समझाया कि लौट जाओ तो सास, ससुर, गुरु और परिवार की व्याकुलता मिट जाए। वैदेही बोलीं, हे प्राणपति, सुनिए। प्रभु करुणामय और परम विवेकी हैं, शरीर छोड़कर छाया कैसे अलग रोकी जाए? सूर्य बिना प्रभा कहाँ जाए, चन्द्रमा बिना चाँदनी कहाँ जाए? फिर वे मन्त्री से मधुर वाणी में बोलीं, आप पिता और ससुर के समान मेरे हितकारी हैं, आपको उत्तर देना अनुचित है। हे तात, दुख के वश सामने बोली हूँ, बुरा न मानिए। आर्यपुत्र के चरणकमलों के बिना सारे नाते व्यर्थ हैं।

97.1

बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती । आरति प्रीति न सो कहि जाती ॥
पितु सँदेस सुनि कृपानिधाना । सियहि दीन्ह सिख कोटि विधाना ॥

binatī bhūpa kīnha jehi bhām̐tī | ārati prīti na so kahi jātī ||
pitu sam̐desa suni kṛpānidhānā | siyahi dīnha sikha koṭi vidhānā ||

97.2

सासु ससुर गुरु प्रिय परिवारू । फिरतु त सब कर मिटइ खभारू ॥
सुनि पति-बचन कहति बैदेही । सुनहु प्रानपति परम-सनेही ॥

sāsu sasura guru priya parivārū | phiratu ta saba kara miṭai khabhārū ||
suni pati-bacana kahati baidehī | sunahu prānapati parama-sanehī ||

97.3

प्रभु करुनामय परम बिबेकी । तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी ॥
प्रभा जाइ कहँ भानु बिहाई । कहँ चन्द्रिका चन्द तजि जाई ॥

prabhu karunāmaya parama bibekī | tanu taji rahati chām̐ha kimi cheṃkī ||
prabhā jāi kaham̐ bhānu bihāī | kaham̐ candrikā canda taji jāī ||

97.4

पतिहि प्रेम-मय बिनय सुनाई । कहति सचिव सन गिरा सुहाई ॥
तुम्ह पितु-ससुर-सरिस हितकारी । उत्तर देउँ फिरि अनुचित भारी ॥

patihi prema-maya binaya sunāī | kahati saciva sana girā suhāī ||
tumha pitu-sasura-sarisa hitakārī | uttara deum̐ phiri anucita bhārī ||

दो॰ 97दोहा

आरति-बस सनमुख भइउँ, बिलग न मानब तात ।
आरज-सुत-पद-कमल बिनु, बादि जहाँ लगि नात ॥

ārati-basa sanamukha bhaium̐, bilaga na mānaba tāta |
āraja-suta-pada-kamala binu, bādi jahām̐ lagi nāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0