अयोध्याकाण्ड

अध्याय 96: राजा का संदेश, सीता को लौटा लाओ

5 श्लोक · 96 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राजा का संदेश, सीता को लौटा लाओ

श्रीराम कहते हैं, हे तात, आप पिता के समान मेरे हितैषी हैं, हाथ जोड़कर विनती है कि वही करें जिससे पिता हमारे सोच में दुख न पाएँ। यह संवाद सुनकर निषाद परिवार सहित व्याकुल हो गया। फिर लक्ष्मण ने कुछ कड़वी बात कही, प्रभु ने उसे बहुत अनुचित जानकर रोका और सकुचाकर सुमन्त्र को शपथ दिलाई कि लक्ष्मण की बात न कहना। तब सुमन्त्र ने राजा का संदेश कहा कि सीता वन के कष्ट नहीं सह सकेंगी। जैसे भी सीता अवध लौटें, वही रघुबर को और तुम्हें करना है, नहीं तो मैं जल बिना मछली की तरह नहीं जीऊँगा। मायके और ससुराल में सब सुख है, विपत्ति बीतने तक सीता जहाँ चाहें सुख से रहें।

96.1

तुम्ह पुनि पितु सम अति हित मेरे । बिनती करउँ तात कर जोरें ॥
सब विधि सोइ करतव्य तुम्हारें । दुख न पाव पितु सोच हमारें ॥

tumha puni pitu sama ati hita mere | binatī karaum̐ tāta kara joreṃ ||
saba vidhi soi karatavya tumhāreṃ | dukha na pāva pitu soca hamāreṃ ||

96.2

सुनि रघुनाथ सचिव संबादू । भयउ सपरिजन विकल निषादू ॥
पुनि कछु लखन कही कटु बानी । प्रभु बरजे बड़ अनुचित जानी ॥

suni raghunātha saciva saṃbādū | bhayau saparijana vikala niṣādū ||
puni kachu lakhana kahī kaṭu bānī | prabhu baraje bar̤a anucita jānī ||

96.3

सकुचि राम निज सपथ देवाई । लखन सँदेस कहिय जनि जाई ॥
कह सुमन्त्र पुनि भूप सँदेसू । सहि न सकिहि सिय बिपिन कलेसू ॥

sakuci rāma nija sapatha devāī | lakhana sam̐desa kahiya jani jāī ||
kaha sumantra puni bhūpa sam̐desū | sahi na sakihi siya bipina kalesū ||

96.4

जेहि बिधि अवध आव फिरि सीया । सोइ रघुबरहि तुम्हहिँ करनीया ॥
नतरु निपट अवलम्ब बिहीना । मैं न जिअब जिमि जल बिनु मीना ॥

jehi bidhi avadha āva phiri sīyā | soi raghubarahi tumhahim̐ karanīyā ||
nataru nipaṭa avalamba bihīnā | maiṃ na jiaba jimi jala binu mīnā ||

दो॰ 96दोहा

मइकें ससरें सकल सुख, जबहिँ जहाँ मन मान ।
तह तब रहिहि सुखेन सिय, जब लगि बिपति-बिहान ॥

maikeṃ sasareṃ sakala sukha, jabahim̐ jahām̐ mana māna |
taha taba rahihi sukhena siya, jaba lagi bipati-bihāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0