अयोध्याकाण्ड

अध्याय 95: श्रीराम का सुमन्त्र को सत्य धर्म का बोध

5 श्लोक · 95 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम का सुमन्त्र को सत्य धर्म का बोध

सुमन्त्र विनती करता है कि हे तात, वही कीजिए जिससे अवध अनाथ न हो। श्रीराम ने उसे उठाकर समझाया, हे तात, आपने धर्म के सब मत खोज लिए हैं। शिबि, दधीचि और राजा हरिश्चन्द्र ने धर्म के लिए करोड़ों कष्ट सहे, रन्तिदेव और बलि ने अनेक संकट सहकर धर्म निभाया। वेद, आगम और पुराण कहते हैं कि सत्य के समान दूसरा धर्म नहीं। वही धर्म मुझे सहज मिल गया है, उसे छोड़ने से तीनों लोकों में अपयश छा जाएगा, और प्रतिष्ठित पुरुष के लिए अपयश करोड़ों मृत्यु जैसी जलन है। आपसे अधिक क्या कहूँ, उत्तर देने से मुझे पाप लगेगा। पिता के चरण पकड़कर करोड़ों प्रणाम कहना और हाथ जोड़कर विनती करना कि मेरी कोई चिन्ता न करें।

95.1

तात कृपा करि कीजिय सोई । जातें अवध अनाथ न होई ॥
मंत्रहि राम उठाइ प्रबोधा । तात धरम-मत तुम्ह सब सोधा ॥

tāta kṛpā kari kījiya soī | jāteṃ avadha anātha na hoī ||
maṃtrahi rāma uṭhāi prabodhā | tāta dharama-mata tumha saba sodhā ||

95.2

सिबि दधीचि हरिचन्द नरेसा । सहे धरम हित कोटि कलेसा ॥
रन्तिदेव बलि भूप सुजाना । धरम धरेउ सहि सङ्कट नाना ॥

sibi dadhīci haricanda naresā | sahe dharama hita koṭi kalesā ||
rantideva bali bhūpa sujānā | dharama dhareu sahi saṅkaṭa nānā ||

95.3

धरम न दूसर सत्य समाना । आगम निगम पुरान बखाना ॥
मैं सोइ धरम सुलभ करि पावा । तजें तिहूँ पुर अपजस छावा ॥

dharama na dūsara satya samānā | āgama nigama purāna bakhānā ||
maiṃ soi dharama sulabha kari pāvā | tajeṃ tihūm̐ pura apajasa chāvā ||

95.4

सम्भावित कह अपजस लाहू । मरन कोटि सम दारुन दाहू ॥
तुम्ह सन तात बहुत का कहऊँ । दिये उत्तर फिरि पातक लहऊँ ॥

sambhāvita kaha apajasa lāhū | marana koṭi sama dāruna dāhū ||
tumha sana tāta bahuta kā kahaūm̐ | diye uttara phiri pātaka lahaūm̐ ||

दो॰ 95दोहा

पितु पद गहि कहि कोटि नति, बिनय करब कर जोरि ।
चिन्ता कवनिहु बात के, तात करिय जनि मोरि ॥

pitu pada gahi kahi koṭi nati, binaya karaba kara jori |
cintā kavanihu bāta ke, tāta kariya jani mori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0