उठे लखन प्रभु सोवत जानी । कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी ॥
कछुक दूरि सजि बान-सरासन । जागन लगे बैठि बीरासन ॥
uṭhe lakhana prabhu sovata jānī | kahi sacivahi sovana mṛdu bānī ||
kachuka dūri saji bāna-sarāsana | jāgana lage baiṭhi bīrāsana ||
5 श्लोक · 90 में से 326
प्रभु को सोया जानकर लक्ष्मण उठे, कोमल वाणी से मन्त्री को सोने के लिए कहा, और कुछ दूर धनुष बाण सजाकर वीरासन में बैठकर जागने लगे। गुह ने विश्वासी पहरेदार जगह जगह रख दिए, और स्वयं कमर में तरकश बाँध, धनुष पर बाण चढ़ाकर लक्ष्मण के पास बैठ गया। सोते प्रभु को देखकर निषाद के हृदय में प्रेम से विषाद उमड़ आया। शरीर पुलकित हुआ, आँखों से आँसू बहने लगे, और वह लक्ष्मण से कहने लगा। राजा का भवन ऐसा सुन्दर है कि इन्द्र का महल भी उसकी बराबरी नहीं करता। मणियों से रचे चौबारे ऐसे हैं मानो कामदेव ने अपने हाथ से सँवारे हों। वहाँ पवित्र, विचित्र कक्ष हैं, फूलों की सुगन्ध है, सुन्दर पलंग और मणियों के दीपक हैं, सब प्रकार का सुख है।
उठे लखन प्रभु सोवत जानी । कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी ॥
कछुक दूरि सजि बान-सरासन । जागन लगे बैठि बीरासन ॥
uṭhe lakhana prabhu sovata jānī | kahi sacivahi sovana mṛdu bānī ||
kachuka dūri saji bāna-sarāsana | jāgana lage baiṭhi bīrāsana ||
गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती । ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती ॥
आपु लखन पहिं बैठेउ जाई । कटि भाथी सर चाप चढ़ाई ॥
gum̐ha bolāi pāharū pratītī | ṭhāvam̐ ṭhām̐va rākhe ati prītī ||
āpu lakhana pahiṃ baiṭheu jāī | kaṭi bhāthī sara cāpa car̤hāī ||
सोवत प्रभुहि निहारि निषादू । भयउ प्रेम-बस हृदय बिषादू ॥
तनु पुलकित जल लोचन बहई । बचन सप्रेम लखन सन कहई ॥
sovata prabhuhi nihāri niṣādū | bhayau prema-basa hṛdaya biṣādū ||
tanu pulakita jala locana bahaī | bacana saprema lakhana sana kahaī ||
भूपति भवन सुभायँ सुहावा । सुरपति सदनु न पटतर पावा ॥
मनिमय रचित चारु चौबारे । जनु रतिपति निज हाथ सँवारे ॥
bhūpati bhavana subhāyam̐ suhāvā | surapati sadanu na paṭatara pāvā ||
manimaya racita cāru caubāre | janu ratipati nija hātha sam̐vāre ||
सुचि सुबिचित्र सुभोगमय, सुमन सुगन्ध सुबास ।
पलंग-मज्जु मनि-दीप जहँ, सब बिधि सकल सुपास ॥
suci subicitra subhogamaya, sumana sugandha subāsa |
palaṃga-majju mani-dīpa jaham̐, saba bidhi sakala supāsa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0