बिबिध बसन उपधान तुराई । छीर-फेन मृदु बिसद सुहाई ॥
तहँ सिय राम सयन निसि करहीं । निज छबि रति-मनोज मद हरहीं ॥
bibidha basana upadhāna turāī | chīra-phena mṛdu bisada suhāī ||
taham̐ siya rāma sayana nisi karahīṃ | nija chabi rati-manoja mada harahīṃ ||
5 श्लोक · 91 में से 326
गुह आगे कहता है, उस भवन में दूध के फेन जैसे कोमल उजले बिछौनों पर सीता और राम सोते हैं और अपनी छवि से रति और कामदेव का गर्व हर लेते हैं। वही सिय राम आज घास की साथरी पर थके हुए, बिना ओढ़ने के सो रहे हैं, यह देखा नहीं जाता। माता, पिता, परिजन, पुरवासी, सखा, दास और दासियाँ जिन्हें प्राणों की तरह सँभालते हैं, वे स्वामी भूमि पर सो रहे हैं। जिनके पिता जनक जगत प्रसिद्ध हैं, ससुर इन्द्र के सखा रघुराज हैं, पति रामचन्द्र हैं, वे वैदेही भूमि पर सो रही हैं। विधाता किसके प्रतिकूल नहीं होता? लोग सच कहते हैं कि कर्म ही प्रधान है। मन्दबुद्धि कैकेयी ने कठोर कुटिलता की, जिसने सुख के अवसर पर दुख दिया।
बिबिध बसन उपधान तुराई । छीर-फेन मृदु बिसद सुहाई ॥
तहँ सिय राम सयन निसि करहीं । निज छबि रति-मनोज मद हरहीं ॥
bibidha basana upadhāna turāī | chīra-phena mṛdu bisada suhāī ||
taham̐ siya rāma sayana nisi karahīṃ | nija chabi rati-manoja mada harahīṃ ||
ते सिय-राम साथरीं सोये । श्रमित बसन बिनु जाहिँ न जोए ॥
मातु पिता परिजन पुरबासी । सखा सुसील दास अरु दासी ॥
te siya-rāma sātharīṃ soye | śramita basana binu jāhim̐ na joe ||
mātu pitā parijana purabāsī | sakhā susīla dāsa aru dāsī ||
जोगवहिँ जिन्हहिँ प्रान की नाई । महि सोवत तेइ राम गोसाँई ॥
पिता जनक जग बिदित प्रभाऊ । ससुर सुरेस-सखा रघुराऊ ॥
jogavahim̐ jinhahim̐ prāna kī nāī | mahi sovata tei rāma gosām̐ī ||
pitā janaka jaga bidita prabhāū | sasura suresa-sakhā raghurāū ||
रामचन्द्र पति सो बैदेही । सोवत महि बिधि बाम न केही ॥
सिय-रघुबीर कि कानन जोगू । करम-प्रधान सत्य कह लोगू ॥
rāmacandra pati so baidehī | sovata mahi bidhi bāma na kehī ||
siya-raghubīra ki kānana jogū | karama-pradhāna satya kaha logū ||
कैकय-नन्दिनि मन्द-मति, कठिन कुटिल-पन कीन्ह ।
जेहि रघुनन्दन जानकिहि, सुख अवसर दुख दीन्ह ॥
kaikaya-nandini manda-mati, kaṭhina kuṭila-pana kīnha |
jehi raghunandana jānakihi, sukha avasara dukha dīnha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0