अयोध्याकाण्ड

अध्याय 88: निषादराज गुह का प्रेम भरा स्वागत

5 श्लोक · 88 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

निषादराज गुह का प्रेम भरा स्वागत

यह समाचार पाकर निषादराज गुह ने प्रसन्न होकर बन्धुओं को बुलाया, फल और कन्द मूल के भार भरे, और अपार हर्ष से मिलने चला। दण्डवत करके भेंट आगे रखी और अनुराग से प्रभु को निहारने लगा। रघुराई ने उसे पास बैठाकर कुशल पूछी। गुह बोला कि नाथ, आपके चरणकमलों के दर्शन से ही कुशल है, आज मैं भाग्यवान हुआ। यह भूमि, धन और घर सब आपका है, मैं तो परिवार सहित नीच सेवक हूँ। कृपा कर नगर में पधारिए, जिससे सब लोग मुझसे ईर्ष्या करें। श्रीराम ने कहा, हे चतुर सखा, तुमने सब सत्य कहा, पर पिता ने मुझे दूसरी आज्ञा दी है, चौदह वर्ष मुनियों के व्रत, वेश और आहार के साथ वन में रहना है, इसलिए गाँव में रहना उचित नहीं। यह सुनकर गुह को बड़ा दुख हुआ।

88.1

यह सुधि गुहँ-निषाद जब पाई । मुदित लिये प्रिय-बन्धु बोलाई ॥
लिए फल मूल भेँट भरि भारा । मिलन चलेउ हिय हरष अपारा ॥

yaha sudhi guham̐-niṣāda jaba pāī | mudita liye priya-bandhu bolāī ||
lie phala mūla bhem̐ṭa bhari bhārā | milana caleu hiya haraṣa apārā ||

88.2

करि दंडवत भेँट धरि आगें । प्रभुहि बिलोकत अति अनुरागें ॥
सहज-सनेह-बिबस रघुराई । पूछी कुसल निकट बैठाई ॥

kari daṃḍavata bhem̐ṭa dhari āgeṃ | prabhuhi bilokata ati anurāgeṃ ||
sahaja-saneha-bibasa raghurāī | pūchī kusala nikaṭa baiṭhāī ||

88.3

नाथ कुसल पद पङ्कज देखें । भयउँ भागभाजन जन लेखें ॥
देव धरनि-धन-धाम तुम्हारा । मैं जन नीच सहित परिवारा ॥

nātha kusala pada paṅkaja dekheṃ | bhayaum̐ bhāgabhājana jana lekheṃ ||
deva dharani-dhana-dhāma tumhārā | maiṃ jana nīca sahita parivārā ||

88.4

कृपा करिय पुर धारिअ पाऊ । थापिय जन सब लोग सिहाऊ ॥
कहेहु सत्य सब सखा सुजाना । मोहि दीन्ह पितु आयसु आना ॥

kṛpā kariya pura dhāria pāū | thāpiya jana saba loga sihāū ||
kahehu satya saba sakhā sujānā | mohi dīnha pitu āyasu ānā ||

दो॰ 88दोहा

बरष चारिदस बास बन, मुनि-ब्रत-बेष-अहार ।
ग्राम-बास नहिँ उचित सुनि, गुहहि भयउ दुख-भार ॥

baraṣa cāridasa bāsa bana, muni-brata-beṣa-ahāra |
grāma-bāsa nahim̐ ucita suni, guhahi bhayau dukha-bhāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0