अयोध्याकाण्ड

अध्याय 80: जाने से पहले श्रीराम की व्यवस्था

5 श्लोक · 80 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

जाने से पहले श्रीराम की व्यवस्था

बाहर निकलकर श्रीराम वसिष्ठ के द्वार पर खड़े हुए और देखा कि लोग विरह की आग में जल रहे हैं। प्रिय वचन कहकर सबको समझाया, फिर ब्राह्मणों के समूह को बुलाया। गुरु से कहकर उन्हें वर्ष भर का अन्न दिया। याचकों को दान और मान देकर सन्तुष्ट किया, पवित्र मित्रों को प्रेम से प्रसन्न किया। फिर दासियों और दासों को बुलाकर गुरु को सौंपा और हाथ जोड़कर कहा, हे स्वामी, पिता माता की तरह सबकी सार सँभाल करना। बार बार दोनों हाथ जोड़कर श्रीराम सबसे कोमल वाणी में कहते हैं कि वही सब प्रकार मेरा हितकारी है जिससे राजा सुखी रहें। हे परम प्रवीण पुरवासियो, वही उपाय करना जिससे मेरी सब माताएँ मेरे विरह में दुःख से दीन न हों।

80.1

निकसि बसिष्ठ द्वार भये ठाढ़े । देखे लोग बिरह दव दाढ़े ॥
कहि प्रिय बचन सकल समुझाये । विप्र-बृन्द रघुबीर बोलाये ॥

nikasi basiṣṭha dvāra bhaye ṭhār̤he | dekhe loga biraha dava dār̤he ||
kahi priya bacana sakala samujhāye | vipra-bṛnda raghubīra bolāye ||

80.2

गुरु सन कहि बरषासन दीन्हे । आदर-दान-बिनय बस कीन्हे ॥
जाचक दान मान सन्तोषे । मीत पुनीत प्रेम परितोषे ॥

guru sana kahi baraṣāsana dīnhe | ādara-dāna-binaya basa kīnhe ||
jācaka dāna māna santoṣe | mīta punīta prema paritoṣe ||

80.3

दासीं दास बोलाइ बहोरी । गुरुहि सौंपि बोले कर जोरी ॥
सब के सार सँभार गोसाँई । करबि जनक-जननी की नाई ॥

dāsīṃ dāsa bolāi bahorī | guruhi sauṃpi bole kara jorī ||
saba ke sāra sam̐bhāra gosām̐ī | karabi janaka-jananī kī nāī ||

80.4

बारहिँ बार जोरि जुग पानी । कहत राम सब सन मृदु बानी ॥
सोइ सब भाँति मोर हितकारी । जेहि तेँ रहइ भुआल सुखारी ॥

bārahim̐ bāra jori juga pānī | kahata rāma saba sana mṛdu bānī ||
soi saba bhām̐ti mora hitakārī | jehi tem̐ rahai bhuāla sukhārī ||

दो॰ 80दोहा

मातु सकल मोरे बिरहँ, जेहिं न होहिं दुख दीन ।
सोइ उपाउ तुम्ह करेहु सब, पुर जन परम प्रबीन ॥

mātu sakala more biraham̐, jehiṃ na hohiṃ dukha dīna |
soi upāu tumha karehu saba, pura jana parama prabīna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0