अयोध्याकाण्ड

अध्याय 79: कैकेयी ने मुनि वस्त्र ला रखे

5 श्लोक · 79 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

कैकेयी ने मुनि वस्त्र ला रखे

संकोच के कारण सीता उत्तर नहीं देतीं। यह सुनकर कैकेयी तमककर उठी और मुनियों के वस्त्र, आभूषण और पात्र लाकर आगे रख दिए, फिर कोमल वाणी में बोली, हे रघुवीर, तुम राजा को प्राणों के समान प्रिय हो। पुण्य, सुयश और परलोक भले नष्ट हो जाए, पर तुम्हें वन जाने को कभी नहीं कहेंगे। यह विचारकर जो तुम्हें अच्छा लगे वही करो। माता की सीख सुनकर राम को सुख मिला, पर राजा को वे वचन बाण जैसे लगे, फिर भी अभागे प्राण नहीं निकले। लोग व्याकुल हैं, राजा मूर्छित हैं, किसी को कुछ नहीं सूझता। श्रीराम ने तुरन्त मुनि वेष बनाया, पिता और माता को सिर नवाकर चले। पत्नी और भाई के साथ, ब्राह्मणों और गुरु के चरणों की वन्दना कर प्रभु सबको अचेत करके चल पड़े।

79.1

सीय सकुच बस उतर न देई । सो सुनि तमकि उठी कैकेई ॥
मुनि-पट-भूषन-भाजन आनी । आगें धरि बोली मृदु बानी ॥

sīya sakuca basa utara na deī | so suni tamaki uṭhī kaikeī ||
muni-paṭa-bhūṣana-bhājana ānī | āgeṃ dhari bolī mṛdu bānī ||

79.2

नृपहि प्रान प्रिय तुम्ह रघुबीरा । सील सनेह न छाडिहि भीरा ॥
सुकृत सुजस परलोक नसाऊ । तुम्हहिँ जान बन कहिहि न काऊ ॥

nṛpahi prāna priya tumha raghubīrā | sīla saneha na chāḍihi bhīrā ||
sukṛta sujasa paraloka nasāū | tumhahim̐ jāna bana kahihi na kāū ||

79.3

अस बिचारि सोइ करहु जो भावा । राम जननि सिख सुनि सुख पावा ॥
भूपहि बचन बान सम लागे । करहिं न प्रान पयान अभागे ॥

asa bicāri soi karahu jo bhāvā | rāma janani sikha suni sukha pāvā ||
bhūpahi bacana bāna sama lāge | karahiṃ na prāna payāna abhāge ||

79.4

लोग बिकल मुरछित नरनाहू । काह करिअ कछु सूझ न काहू ॥
राम तुरत मुनि-बेष बनाई । चले जनक जननिहि सिर नाई ॥

loga bikala murachita naranāhū | kāha karia kachu sūjha na kāhū ||
rāma turata muni-beṣa banāī | cale janaka jananihi sira nāī ||

दो॰ 79दोहा

सजि बन-साज-समाज सब, बनिता बन्धु समेत ।
बन्दि विप्र-गुरु-चरन प्रभु, चले करि सबहि अचेत ॥

saji bana-sāja-samāja saba, banitā bandhu sameta |
bandi vipra-guru-carana prabhu, cale kari sabahi aceta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0