अयोध्याकाण्ड

अध्याय 8: रानियों का हर्ष और मंगल की तैयारी

5 श्लोक · 8 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

रानियों का हर्ष और मंगल की तैयारी

जिन्होंने सबसे पहले जाकर यह समाचार सुनाया, उन्हें बहुत से आभूषण और वस्त्र मिले। रनिवास की स्त्रियाँ प्रेम से पुलकित होकर मंगल कलश सजाने लगीं। सुमित्रा ने मणियों से अनेक प्रकार के सुन्दर चौक पूरे। श्रीराम की माता कौसल्या आनन्द में मग्न हैं, उन्होंने ब्राह्मणों को बुलाकर बहुत दान दिया। उन्होंने ग्रामदेवी, देवताओं और नागों की पूजा की, आगे भेंट चढ़ाने का वचन दिया और विनती की कि जिस प्रकार श्रीराम का कल्याण हो, दया करके वही वर दीजिए। कोयल जैसी वाणी, चन्द्रमुखी और मृगनयनी स्त्रियाँ मंगलगीत गा रही हैं। अभिषेक की बात सुनकर नगर के सब नर-नारी हृदय से हर्षित हुए और विधाता को अनुकूल मानकर सजावट में लग गए।

8.1

प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाये । भूषन बसन भूरि तिन्ह पाये ॥
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीँ । मङ्गल कलस सजन सब लागीँ ॥

prathama jāi jinha bacana sunāye | bhūṣana basana bhūri tinha pāye ||
prema pulaki tana mana anurāgīm̐ | maṅgala kalasa sajana saba lāgīm̐ ||

8.2

कई चारु सुमित्राँ पूरी । मनिमय विविध भाँति अति रूरी ॥
आनँद-मगन राम-महँतारी । दिये दान बहु बिप्र हँकारी ॥

kaī cāru sumitrām̐ pūrī | manimaya vividha bhām̐ti ati rūrī ||
ānam̐da-magana rāma-maham̐tārī | diye dāna bahu bipra ham̐kārī ||

8.3

पूजीं ग्रामदेबि-सुर-नागा । कहेउ बहोरि देन बलि भागा ॥
जेहि विधि होइ राम कल्यानू । देहु दया करि सो बरदानू ॥

pūjīṃ grāmadebi-sura-nāgā | kaheu bahori dena bali bhāgā ||
jehi vidhi hoi rāma kalyānū | dehu dayā kari so baradānū ||

8.4

गावहिँ मङ्गल कोकिल-बयनी । बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं ॥

gāvahim̐ maṅgala kokila-bayanī | bidhubadanīṃ mṛgasāvakanayanīṃ ||

दो॰ 8दोहा

राम राज-अभिषेक सुनि, हियँ हरषे नर-नारि ।
लगे सुमङ्गल सजन सब, बिधि अनुकूल बिचारि ॥

rāma rāja-abhiṣeka suni, hiyam̐ haraṣe nara-nāri |
lage sumaṅgala sajana saba, bidhi anukūla bicāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0