अयोध्याकाण्ड

अध्याय 78: राजा और स्त्रियाँ सीता को समझाते हैं

5 श्लोक · 78 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

राजा और स्त्रियाँ सीता को समझाते हैं

राजा ने राम को रखने के लिए छल छोड़कर बहुत उपाय किए, पर राम का रुख देखकर जान लिया कि धर्म के धुरन्धर, धीर और सयाने राम रुकेंगे नहीं। तब राजा ने सीता को हृदय से लगाया और प्रेम से सीख दी। वन के असह्य दुःख कहकर सुनाए और सास, ससुर तथा पिता के घर के सुख समझाए। पर सीता का मन राम के चरणों में अनुरक्त था, उन्हें न घर सुगम लगा न वन कठिन। मन्त्री की पत्नी और गुरु पत्नी स्नेह से कोमल वाणी में कहती हैं, तुम्हें तो वनवास नहीं दिया गया, ससुर, गुरु और सास जो कहें वही करो। यह शीतल, हितकारी, मधुर और कोमल सीख सीता को ऐसे न सुहाई जैसे शरद के चन्द्रमा की चाँदनी लगने पर चकवी व्याकुल हो।

78.1

रायँ राम राखन हित लागी । बहुत उपाय किये छल त्यागी ॥
लखी राम रुख रहत न जाने । धरम धुरन्धर धीर सयाने ॥

rāyam̐ rāma rākhana hita lāgī | bahuta upāya kiye chala tyāgī ||
lakhī rāma rukha rahata na jāne | dharama dhurandhara dhīra sayāne ||

78.2

तब नप सीय लाइ उर लीन्ही । अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही ॥
कहि बन के दुख दुसह सुनाये । सासु ससुर पितु सुख समुझाये ॥

taba napa sīya lāi ura līnhī | ati hita bahuta bhām̐ti sikha dīnhī ||
kahi bana ke dukha dusaha sunāye | sāsu sasura pitu sukha samujhāye ||

78.3

सिय मन राम-चरन अनुरागा । घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा ॥
औरउ सबहिँ सीय समुझाई । कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई ॥

siya mana rāma-carana anurāgā | gharu na sugamu banu biṣamu na lāgā ||
aurau sabahim̐ sīya samujhāī | kahi kahi bipina bipati adhikāī ||

78.4

सचिव-नारि गुरु-नारि सयानी । सहित सनेह कहहिं मृदु बानी ॥
तुम्ह कहँ तो न दीन्ह बनबासू । करहु जो कहहिं ससुर-गुरु-सासू ॥

saciva-nāri guru-nāri sayānī | sahita saneha kahahiṃ mṛdu bānī ||
tumha kaham̐ to na dīnha banabāsū | karahu jo kahahiṃ sasura-guru-sāsū ||

दो॰ 78दोहा

सिख सीतलि हित मधुर मृदु, सुनि सीतहि न सोहानि ।
सरद-चन्द-चंदनि लगत, जनु चकई अकुलानि ॥

sikha sītali hita madhura mṛdu, suni sītahi na sohāni |
sarada-canda-caṃdani lagata, janu cakaī akulāni ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0