अयोध्याकाण्ड

अध्याय 76: तीनों राजा के सामने पहुँचे

5 श्लोक · 76 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

तीनों राजा के सामने पहुँचे

लक्ष्मण वहाँ गए जहाँ जानकीनाथ थे, और प्रिय साथ पाकर मन में प्रसन्न हुए। राम और सीता के सुन्दर चरणों की वन्दना करके वे उनके साथ राजमहल आए। नगर के नर नारी आपस में कहते हैं कि विधाता ने बनी बात बिगाड़ दी। शरीर और मन दुखी हैं, मुख मलिन हैं, जैसे शहद छिन जाने पर मधुमक्खियाँ व्याकुल हों। वे हाथ मलते हैं, सिर धुनकर पछताते हैं, मानो बिना पंख के पक्षी अकुला रहे हों। राजद्वार पर बड़ी भीड़ हो गई, अपार विषाद का वर्णन नहीं हो सकता। मन्त्री ने राजा को उठाकर बैठाया और प्रिय वचन कहकर बताया कि राम पधारे हैं। सीता सहित दोनों पुत्रों को देखकर राजा अत्यन्त व्याकुल हो गए और स्नेह के वश बार बार उन्हें हृदय से लगाते रहे।

76.1

गये लखन जहँ जानकिनाथू । भे मन मुदित पाइ प्रिय साधू ॥
बन्दि राम-सिय-चरन सुहाये । चले सङ्ग नप-मन्दिर आये ॥

gaye lakhana jaham̐ jānakināthū | bhe mana mudita pāi priya sādhū ||
bandi rāma-siya-carana suhāye | cale saṅga napa-mandira āye ||

76.2

कहहिँ परसपर पुर-नर नारी । भलि बनाइ बिधि बात बिगारी ॥
तन मन-दुख बदन-मलीने । बिकल मनहुँ माखी मधु छीने ॥

kahahim̐ parasapara pura-nara nārī | bhali banāi bidhi bāta bigārī ||
tana mana-dukha badana-malīne | bikala manahum̐ mākhī madhu chīne ||

76.3

कर मीजहिँ सिर धुनि पछिताहीँ । जनु बिनु पङ्ख बिहँग अकुलाहीँ ॥
भइ बड़ि भीर भूप-दरबारा । बरनि न जाइ बिषाद अपारा ॥

kara mījahim̐ sira dhuni pachitāhīm̐ | janu binu paṅkha biham̐ga akulāhīm̐ ||
bhai bar̤i bhīra bhūpa-darabārā | barani na jāi biṣāda apārā ||

76.4

सचिवँ उठाइ राउ बैठारे । कहि प्रिय बचन राम पगु धारे ॥
सिय समेत दोउ तनय निहारी । ब्याकुल भयउ भूमिपति भारी ॥

sacivam̐ uṭhāi rāu baiṭhāre | kahi priya bacana rāma pagu dhāre ||
siya sameta dou tanaya nihārī | byākula bhayau bhūmipati bhārī ||

दो॰ 76दोहा

सीय सहित सुत सुभग दोउ, देखि देखि अकुलाइ ।
बारहिं बार सनेह बस, राउ लेइ उर लाइ ॥

sīya sahita suta subhaga dou, dekhi dekhi akulāi |
bārahiṃ bāra saneha basa, rāu lei ura lāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0