माँगहु बिदा मातु सन जाई । आवहु बेगि चलहु बन भाई ॥
मुदित भये सुनि रघुबर बानी । भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी ॥
mām̐gahu bidā mātu sana jāī | āvahu begi calahu bana bhāī ||
mudita bhaye suni raghubara bānī | bhayau lābha bar̤a gai bar̤i hānī ||
5 श्लोक · 73 में से 326
श्रीराम ने कहा, भाई, जाकर माता से विदा माँग आओ और शीघ्र आकर वन चलो। रघुवर की वाणी सुनकर लक्ष्मण प्रसन्न हुए, बड़ा लाभ हुआ और बड़ी हानि टल गई। हर्षित मुख से वे माता के पास आए, मानो अन्धे ने फिर आँखें पा ली हों। माता के चरणों में सिर नवाया, पर मन रघुनन्दन और जानकी के साथ था। माता ने उदास मन देखकर पूछा तो लक्ष्मण ने सब कथा विस्तार से कही। कठोर वचन सुनकर वे ऐसे सहम गईं जैसे हिरनी चारों ओर दावानल देखकर। लक्ष्मण डरे कि माता स्नेह के वश रोक न लें, और विदा माँगते सकुचाए। सुमित्रा ने राम और सीता के रूप, शील और स्वभाव को समझकर और राजा का स्नेह देखकर सिर धुना कि पापिनी ने बुरा दाँव खेला।
माँगहु बिदा मातु सन जाई । आवहु बेगि चलहु बन भाई ॥
मुदित भये सुनि रघुबर बानी । भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी ॥
mām̐gahu bidā mātu sana jāī | āvahu begi calahu bana bhāī ||
mudita bhaye suni raghubara bānī | bhayau lābha bar̤a gai bar̤i hānī ||
हरषित बदन मातु पहिँ आये । मनहुँ अन्ध फिरि लोचन पाये ॥
जाइ जननि-पग नायउ माथा । मन रघुनन्दन जानकि साथा ॥
haraṣita badana mātu pahim̐ āye | manahum̐ andha phiri locana pāye ||
jāi janani-paga nāyau māthā | mana raghunandana jānaki sāthā ||
पूछे मातु मलिन मन देखी । लखन कही सब कथा बिसेखी ॥
गई सहमि सुनि बचन कठोरा । मृगी देखि दव जनु चहुँ ओरा ॥
pūche mātu malina mana dekhī | lakhana kahī saba kathā bisekhī ||
gaī sahami suni bacana kaṭhorā | mṛgī dekhi dava janu cahum̐ orā ||
लखन लखेउ भा अनरथ आजू । एहिं सनेह बस करब अकाजू ॥
माँगत बिदा सभय सकुचाहीँ । जाइ संग बिधि कहिहि कि नाहीं ॥
lakhana lakheu bhā anaratha ājū | ehiṃ saneha basa karaba akājū ||
mām̐gata bidā sabhaya sakucāhīm̐ | jāi saṃga bidhi kahihi ki nāhīṃ ||
समुझि सुमित्राँ राम सिय, रूप-सुसील-सुभाउ ।
नप सनेह लखि धुनेउ सिर, पापिनि दीन्ह कुदाउ ॥
samujhi sumitrām̐ rāma siya, rūpa-susīla-subhāu |
napa saneha lakhi dhuneu sira, pāpini dīnha kudāu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0