अयोध्याकाण्ड

अध्याय 74: सुमित्रा: जहाँ राम, वहीं अवध

5 श्लोक · 74 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सुमित्रा: जहाँ राम, वहीं अवध

कुसमय जानकर सुमित्रा धीरज धरकर कोमल वाणी में बोलीं, बेटा, वैदेही तुम्हारी माता हैं और सब प्रकार स्नेह करने वाले राम पिता। अवध वहीं है जहाँ राम का निवास है, दिन वहीं है जहाँ सूर्य का प्रकाश है। यदि सीता और राम वन जाते हैं तो अवध में तुम्हारा कुछ काम नहीं। गुरु, पिता, माता, भाई, देवता और स्वामी, सबकी सेवा प्राणों के समान करनी चाहिए, पर राम तो प्राणों के प्राण और जीवन के जीवन हैं, सबके निःस्वार्थ सखा। जहाँ तक पूजनीय और प्रिय लोग हैं, सब राम के नाते ही माने जाते हैं। यह जानकर साथ वन जाओ और जगत में जीने का लाभ लो। तुम मेरे सहित बड़े भाग्य के पात्र हुए, क्योंकि तुम्हारे मन ने छल छोड़कर राम के चरणों में ठौर बनाया है।

74.1

धीरज धरेउ कुअवसर जानी । सहज सुहृद बोली मृदु आनी ॥
तात तुम्हारि मातु बैदेही । पिता-राम सब भाँति सनेही ॥

dhīraja dhareu kuavasara jānī | sahaja suhṛda bolī mṛdu ānī ||
tāta tumhāri mātu baidehī | pitā-rāma saba bhām̐ti sanehī ||

74.2

अवध तहाँ जहँ राम-निवासू । तहँइँ दिवस जहँ भानु-प्रकासू ॥
जौँ पै सीय राम बन जाहीँ । अवध तुम्हार काज कछु नाहीं ॥

avadha tahām̐ jaham̐ rāma-nivāsū | taham̐im̐ divasa jaham̐ bhānu-prakāsū ||
jaum̐ pai sīya rāma bana jāhīm̐ | avadha tumhāra kāja kachu nāhīṃ ||

74.3

गुरु पितु मातु बन्धु सुर साँई । सेइअहिं सकल प्रान की नाँई ॥
राम प्रान-प्रिय-जीवन जी के । स्वारथ रहित सखा सबही के ॥

guru pitu mātu bandhu sura sām̐ī | seiahiṃ sakala prāna kī nām̐ī ||
rāma prāna-priya-jīvana jī ke | svāratha rahita sakhā sabahī ke ||

74.4

पूजनीय प्रिय, परम जहाँ तेँ । सब मानिअहिं राम के नातें ॥
अस जियँ जानि सङ्ग बन जाहू । लेहु तात जग जीवन लाहू ॥

pūjanīya priya, parama jahām̐ tem̐ | saba māniahiṃ rāma ke nāteṃ ||
asa jiyam̐ jāni saṅga bana jāhū | lehu tāta jaga jīvana lāhū ||

दो॰ 74दोहा

भूरि भाग भाजन भयहु, मोहि समेत बलि जाउँ ।
जौम तुम्हरें मन छाडि छल, कीन्ह राम-पद ठाउँ ॥

bhūri bhāga bhājana bhayahu, mohi sameta bali jāum̐ |
jauma tumhareṃ mana chāḍi chala, kīnha rāma-pada ṭhāum̐ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0