अयोध्याकाण्ड

अध्याय 71: श्रीराम लक्ष्मण को रुकने को कहते हैं

5 श्लोक · 71 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम लक्ष्मण को रुकने को कहते हैं

श्रीराम कहते हैं, भाई, ऐसा जानकर मेरी सीख सुनो और माता पिता के चरणों की सेवा करो। घर में भरत और शत्रुघ्न नहीं हैं, राजा वृद्ध हैं, मेरे मन में यही दुःख है। यदि मैं तुम्हें साथ लेकर वन जाऊँ तो अवध सब प्रकार से अनाथ हो जाएगा; गुरु, पिता, माता, प्रजा और परिवार, सब पर असह्य दुःख का भार पड़ेगा। रहो और सबको सन्तोष दो; जिस राजा के राज्य में प्रिय प्रजा दुखी रहती है वह अवश्य नरक का अधिकारी होता है। उन शीतल वचनों से वे ऐसे सूख गए जैसे पाला छूने से कमल। प्रेम के वश उत्तर नहीं सूझता, व्याकुल होकर चरण पकड़ लिए और बोले, नाथ, मैं दास हूँ और आप स्वामी, आप ही त्याग दें तो मेरा क्या वश।

71.1

अस जियँ जानि सुनहु सिख भाई । करहु मातु-पितु-पद सेवकाई ॥
भवन भरत रिपुसूदन नाहीँ । राउ बृद्ध मम दुख मन माहीं ॥

asa jiyam̐ jāni sunahu sikha bhāī | karahu mātu-pitu-pada sevakāī ||
bhavana bharata ripusūdana nāhīm̐ | rāu bṛddha mama dukha mana māhīṃ ||

71.2

मैं बन जाउँ तुम्हहिं लेइ साथा । होइ सबहि बिधि अवध अनाथा ॥
गुरु पितु मातु प्रजा परिवारू । सब कहँ परइ दुसह दुख-भारू ॥

maiṃ bana jāum̐ tumhahiṃ lei sāthā | hoi sabahi bidhi avadha anāthā ||
guru pitu mātu prajā parivārū | saba kaham̐ parai dusaha dukha-bhārū ||

71.3

रहहु करहु सब कर परितोषू । नतरु तात होइहि बड़ दोषू ॥
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी । सो नृपु अवसि नरक अधिकारी ॥

rahahu karahu saba kara paritoṣū | nataru tāta hoihi bar̤a doṣū ||
jāsu rāja priya prajā dukhārī | so nṛpu avasi naraka adhikārī ||

71.4

रहहु तात अस नीति बिचारी । सुनत लखन भये ब्याकुल भारी ॥
सिअरें बचन सूखि गये कैसे । परसत तुहिन तामरसु जैसें ॥

rahahu tāta asa nīti bicārī | sunata lakhana bhaye byākula bhārī ||
siareṃ bacana sūkhi gaye kaise | parasata tuhina tāmarasu jaiseṃ ||

दो॰ 71दोहा

उतर न आवत प्रेम-बस, गहे चरन अकुलाइ ।
नाथ दास मैं स्वामि तुम्ह, तजहु त कहाँ बसाइ ॥

utara na āvata prema-basa, gahe carana akulāi |
nātha dāsa maiṃ svāmi tumha, tajahu ta kahām̐ basāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0