अयोध्याकाण्ड

अध्याय 70: लक्ष्मण श्रीराम के पास दौड़े

5 श्लोक · 70 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

लक्ष्मण श्रीराम के पास दौड़े

जब लक्ष्मण ने समाचार पाया, वे व्याकुल और उदास मुख लिए उठ दौड़े। शरीर काँप रहा था, रोमांच था, आँखों में आँसू थे, प्रेम से अधीर होकर उन्होंने श्रीराम के चरण पकड़ लिए। वे जल से निकाली मछली की तरह अवाक खड़े रहे। मन में सोचते हैं कि हमारे सब पुण्य समाप्त हो गए। रघुनाथ मुझसे क्या कहेंगे, घर रखेंगे या साथ ले जाएँगे? श्रीराम ने देखा कि भाई हाथ जोड़े खड़ा है और देह, घर, सबसे तिनका तोड़ चुका है। तब श्रीराम बोले, भाई, प्रेम के वश अधीर मत हो, परिणाम समझकर मन में उत्साह रखो। जो माता, पिता, गुरु और स्वामी की सीख सिर धरकर सहज भाव से पालते हैं, वही जन्म का लाभ पाते हैं, नहीं तो जगत में जन्म व्यर्थ जाता है।

70.1

समाचार जब लछिमन पाये । व्याकुल बिलख बदन उठि धाए ॥
कम्प-पुलक-तन नयन-सनीरा । गहे चरन अति प्रेम अधीरा ॥

samācāra jaba lachimana pāye | vyākula bilakha badana uṭhi dhāe ||
kampa-pulaka-tana nayana-sanīrā | gahe carana ati prema adhīrā ||

70.2

कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े । मीन दीन जनु जल तेँ काढ़े ॥
सोच हृदयँ बिधि का होनिहारा । सब सुख सुकृत सिरान हमारा ॥

kahi na sakata kachu citavata ṭhār̤he | mīna dīna janu jala tem̐ kār̤he ||
soca hṛdayam̐ bidhi kā honihārā | saba sukha sukṛta sirāna hamārā ||

70.3

मो कह काह कहब रघुनाथा । रखिहहिँ भवन कि लेहहिं साथा ॥
राम बिलोकि बन्धु कर जोरें । देह गेह सब सन तृनु तोरें ॥

mo kaha kāha kahaba raghunāthā | rakhihahim̐ bhavana ki lehahiṃ sāthā ||
rāma biloki bandhu kara joreṃ | deha geha saba sana tṛnu toreṃ ||

70.4

बोले बचन राम नय-नागर । सील सनेह सरल सुख-सागर ॥
तात प्रेम-बस जनि कदराहू । समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू ॥

bole bacana rāma naya-nāgara | sīla saneha sarala sukha-sāgara ||
tāta prema-basa jani kadarāhū | samujhi hṛdayam̐ parināma uchāhū ||

दो॰ 70दोहा

मातु-पिता-गुरु-स्वामि सिख, सिर धरि करहिँ सुभायँ ।
लहेउ लाभ तिन्ह जनम कर, नतरु जनम जग जायँ ॥

mātu-pitā-guru-svāmi sikha, sira dhari karahim̐ subhāyam̐ |
laheu lābha tinha janama kara, nataru janama jaga jāyam̐ ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0