अयोध्याकाण्ड

अध्याय 69: कौसल्या का सीता को आशीर्वाद

5 श्लोक · 69 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

कौसल्या का सीता को आशीर्वाद

माता को स्नेह से कातर और वचन न पाती हुई देखकर श्रीराम ने अनेक प्रकार से समझाया; उस समय के स्नेह का वर्णन नहीं हो सकता। तब जानकी सास के पैरों लगकर बोलीं, माता, सुनिए, मैं परम अभागिनी हूँ। सेवा के समय विधाता ने वन दे दिया और मेरा मनोरथ सफल नहीं किया। क्षोभ छोड़ दीजिए पर कृपा मत छोड़िए; कर्म कठिन है, मेरा कुछ दोष नहीं। सीता के वचन सुनकर सास व्याकुल हो गईं, उनकी दशा किस प्रकार बखानी जाए। बार बार उन्हें हृदय से लगाया, फिर धीरज धरकर सीख और आशीर्वाद दिया कि जब तक गंगा और यमुना की धारा बहे, तुम्हारा सुहाग अचल रहे। सास से अनेक प्रकार की सीख और आशीष पाकर सीता अत्यन्त प्रेम से बार बार चरणकमलों में सिर नवाकर चलीं।

69.1

लखि सनेह कातरि महतारी । बचन न पाव विकल भइ भारी ॥
राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना । समउ सनेह न जाइ बखाना ॥

lakhi saneha kātari mahatārī | bacana na pāva vikala bhai bhārī ||
rāma prabodhu kīnha bidhi nānā | samau saneha na jāi bakhānā ||

69.2

तब जानकी सासु पग लागी । सुनिय माय मैं परम अभागी ॥
सेवा समय दैव बन दीन्हा । मोर मनोरथ सफल न कीन्हा ॥

taba jānakī sāsu paga lāgī | suniya māya maiṃ parama abhāgī ||
sevā samaya daiva bana dīnhā | mora manoratha saphala na kīnhā ||

69.3

तजब छोभ जनि छाड़िअ छोहू । करम कठिन कछु दोष न मोहू ॥
सुनि सिय बचन सासु अकुलानी । दसा कवनि बिधि कहउँ बखानी ॥

tajaba chobha jani chār̤ia chohū | karama kaṭhina kachu doṣa na mohū ||
suni siya bacana sāsu akulānī | dasā kavani bidhi kahaum̐ bakhānī ||

69.4

बारहिं बार लाइ उर लीन्ही । धरि धीरज सिख आसिष दीन्ही ॥
अचल होउ अहिवात तुम्हारा । जब लगि गङ्ग-जमुन-जल धारा ॥

bārahiṃ bāra lāi ura līnhī | dhari dhīraja sikha āsiṣa dīnhī ||
acala hou ahivāta tumhārā | jaba lagi gaṅga-jamuna-jala dhārā ||

दो॰ 69दोहा

सीतहि सासु असीस सिख, दीन्हि अनेक प्रकार ।
चली नाइ पद-पदुम सिर, अति हित बारहिँ बार ॥

sītahi sāsu asīsa sikha, dīnhi aneka prakāra |
calī nāi pada-paduma sira, ati hita bārahim̐ bāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0