अयोध्याकाण्ड

अध्याय 62: श्रीराम वन के कष्ट बताते हैं

5 श्लोक · 62 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम वन के कष्ट बताते हैं

श्रीराम आगे कहते हैं, हे सयानी सुमुखि, पिता का वचन सत्य करके मैं शीघ्र लौटूँगा, दिन बीतते देर नहीं लगेगी। सुन्दरी, मेरी सीख सुनो। यदि प्रेम के वश हठ करोगी तो अन्त में दुःख पाओगी। वन कठिन और अत्यन्त भयानक है, वहाँ कड़ी धूप, जाड़ा, वर्षा और आँधी है। रास्ते में कुश, काँटे और अनेक कंकड़ हैं, जिन पर बिना जूते पैदल चलना होगा; तुम्हारे चरणकमल कोमल हैं और मार्ग में बड़े बड़े पहाड़ हैं। गुफाएँ, खोह, नदियाँ, नद और नाले ऐसे अगम और गहरे हैं कि देखे नहीं जाते। भालू, बाघ, भेड़िये, सिंह और हाथी ऐसा नाद करते हैं कि धीरज भाग जाए। धरती पर सोना, वल्कल पहनना, कन्द, मूल और फल खाना, और ये भी सदा हर दिन नहीं मिलेंगे।

62.1

मैं पुनि करि प्रवान पितु बानी । बेगि फिरब सुनु सुमुखि सयानी ॥
दिवस जात नहिँ लागिहि बारा । सुन्दरि सिखवन सुनहु हमारा ॥

maiṃ puni kari pravāna pitu bānī | begi phiraba sunu sumukhi sayānī ||
divasa jāta nahim̐ lāgihi bārā | sundari sikhavana sunahu hamārā ||

62.2

जौँ हठ करहु प्रेम-बस बामा । तो तुम्ह दुख पाउब परिनामा ॥
कानन कठिन भयङ्कर भारी । घोर घामु हिम बारि बयारी ॥

jaum̐ haṭha karahu prema-basa bāmā | to tumha dukha pāuba parināmā ||
kānana kaṭhina bhayaṅkara bhārī | ghora ghāmu hima bāri bayārī ||

62.3

कुस कंटक मा काँकर नाना । चलब पयादेहिं बिनु पदत्राना ॥
चरन-कमल मृदु-मञ्जु तुम्हारे । मारग अगम भूमिधर भारे ॥

kusa kaṃṭaka mā kām̐kara nānā | calaba payādehiṃ binu padatrānā ||
carana-kamala mṛdu-mañju tumhāre | māraga agama bhūmidhara bhāre ||

62.4

कन्दर खोह नदीं नद नारे । अगम अगाध न जाहिँ निहारे ॥
भालु बाघ बृक केहरि नागा । करहिँ नाद सुनि धीरज भागा ॥

kandara khoha nadīṃ nada nāre | agama agādha na jāhim̐ nihāre ||
bhālu bāgha bṛka kehari nāgā | karahim̐ nāda suni dhīraja bhāgā ||

दो॰ 62दोहा

भूमि-सवन बलकल-बसन, असन कन्द फल मूल ।
ते कि सदा सब दिन मिलिहिं, सबइ समय अनुकूल ॥

bhūmi-savana balakala-basana, asana kanda phala mūla |
te ki sadā saba dina milihiṃ, sabai samaya anukūla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0