अयोध्याकाण्ड

अध्याय 6: अभिषेक की सामग्री के लिए गुरु की आज्ञा

5 श्लोक · 6 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

अभिषेक की सामग्री के लिए गुरु की आज्ञा

मुनीश वसिष्ठ ने हर्षित होकर कोमल वाणी में कहा कि सब श्रेष्ठ तीर्थों का जल लाओ। औषधि, मूल, फूल, फल और अनेक मंगल वस्तुओं के नाम गिनकर बताए। चँवर, मृगचर्म, ऊनी और रेशमी वस्त्रों की अनगिनत जातियाँ, मणियाँ और वे सब वस्तुएँ जो राजा के अभिषेक के योग्य हैं, मँगाने को कहा। वेद का पूरा विधान बताकर आज्ञा दी कि नगर में अनेक मण्डप बनाओ। फलों से लदे आम, सुपारी और केले के वृक्ष गलियों में चारों ओर रोपो। मणियों के सुन्दर चौक पूरो और बाज़ार शीघ्र सजवाओ। गणपति, गुरु और कुलदेवता की पूजा करो और सब प्रकार ब्राह्मणों की सेवा करो। ध्वजा, पताका, तोरण, कलश, घोड़े, रथ और हाथी सजाओ। मुनि के वचन सिर पर रखकर सब अपने काम में लग गए।

6.1

हरषि मुनीस कहेउ मृदु-बानी । आनहु सकल सुतीरथ पानी ॥
औषध मूल फूल फल पानी । कहे नाम गनि मङ्गल नाना ॥

haraṣi munīsa kaheu mṛdu-bānī | ānahu sakala sutīratha pānī ||
auṣadha mūla phūla phala pānī | kahe nāma gani maṅgala nānā ||

6.2

चामर चरम बसन बहु भाँती । रोम पाट पट अगनित जाती ॥
मनि-गन मङ्गल-बस्तु अनेका । जो जग जोग भूप अभिषेका ॥

cāmara carama basana bahu bhām̐tī | roma pāṭa paṭa aganita jātī ||
mani-gana maṅgala-bastu anekā | jo jaga joga bhūpa abhiṣekā ||

6.3

बेद-बिदित कहि सकल बिधाना । कहेउ रचहु पुर बिबिध-बिताना ॥
सफल रसाल पूगफल केरा । रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा ॥

beda-bidita kahi sakala bidhānā | kaheu racahu pura bibidha-bitānā ||
saphala rasāla pūgaphala kerā | ropahu bīthinha pura cahum̐ pherā ||

6.4

रचहु मज्जु मनि चौकें चारू । कहहु बनावन बेगि बजारू ॥
पूजहु गनपति-गुरु-कुलदेवा । सब विधि करहु भूमिसुर-सेवा ॥

racahu majju mani caukeṃ cārū | kahahu banāvana begi bajārū ||
pūjahu ganapati-guru-kuladevā | saba vidhi karahu bhūmisura-sevā ||

दो॰ 6दोहा

ध्वज पताक तोरन कलस, सजहु तुरग रथ नाग ।
सिर धरि मुनिबर बचन सब, निज निज काजहिं लाग ॥

dhvaja patāka torana kalasa, sajahu turaga ratha nāga |
sira dhari munibara bacana saba, nija nija kājahiṃ lāga ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0