अयोध्याकाण्ड

अध्याय 58: सास के चरणों में सीता का मौन शोक

5 श्लोक · 58 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

सास के चरणों में सीता का मौन शोक

सास ने कोमल वाणी से सीता को आशीर्वाद दिया और उनकी अत्यन्त सुकुमारता देखकर व्याकुल हो गईं। रूप की राशि, पति प्रेम में पवित्र सीता सिर झुकाए बैठी सोचती हैं, प्राणनाथ वन जाना चाहते हैं; देखें किस पुण्यवान का उनसे साथ होगा, शरीर और प्राण दोनों का या केवल प्राणों का। वे सुन्दर चरणों के नख से धरती कुरेदती हैं, और नूपुर ऐसे मधुर बजते हैं मानो प्रेम के वश विनती कर रहे हों कि सीता के चरण हमें न छोड़ें। सुन्दर नेत्रों से आँसू बहते देख राम की माता बोलीं, बेटा, सुनो, सीता अत्यन्त सुकुमारी हैं, सास ससुर और परिजनों को प्यारी हैं। इनके पिता जनक राजाओं के मणि हैं, ससुर सूर्यकुल के सूर्य, और पति सूर्यकुल रूपी कुमुदवन के चन्द्रमा।

58.1

दीन्हि असीस सासु मृदु बानी । अति सुकुमारि देखि अकुलानी ॥
बैठि नमित मुख सोचति सीता । रूप-रासि पति-प्रेम पुनीता ॥

dīnhi asīsa sāsu mṛdu bānī | ati sukumāri dekhi akulānī ||
baiṭhi namita mukha socati sītā | rūpa-rāsi pati-prema punītā ||

58.2

चलन चहत बन जीवननाथू । केहि सुकृती सन होइहि साथू ॥
की तनु-प्रान कि केवल प्राना । बिधि करतब कछु जाइ न जाना ॥

calana cahata bana jīvananāthū | kehi sukṛtī sana hoihi sāthū ||
kī tanu-prāna ki kevala prānā | bidhi karataba kachu jāi na jānā ||

58.3

चारु चरन नख लेखति धरनी । नूपुर-मुखर मधुर कवि बरनी ॥
मनहुँ प्रेम-बस बिनती करहीँ । हमहि सीय-पद जनि परिहरहीं ॥

cāru carana nakha lekhati dharanī | nūpura-mukhara madhura kavi baranī ||
manahum̐ prema-basa binatī karahīm̐ | hamahi sīya-pada jani pariharahīṃ ||

58.4

मज्जु बिलोचन मोचति बारी । बोली देखि राम-महतारी ॥
तात सुनहु सिय अति सुकुमारी । सासु ससुर परिजनहि पियारी ॥

majju bilocana mocati bārī | bolī dekhi rāma-mahatārī ||
tāta sunahu siya ati sukumārī | sāsu sasura parijanahi piyārī ||

दो॰ 58दोहा

पिता जनक भूपाल-मनि, ससुर भानुकुल-भानु ।
पति रबिकुल-कैरव-बिपिन, बिधु गुन-रूप-निधान ॥

pitā janaka bhūpāla-mani, sasura bhānukula-bhānu |
pati rabikula-kairava-bipina, bidhu guna-rūpa-nidhāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0