अजस होउ जग सुजस नसाऊ । नरक परउँ बरु सुरपुर जाऊ ॥
सब दुख दुसह सहावहु मोहीं । लोचन ओट राम जनि होंही ॥
ajasa hou jaga sujasa nasāū | naraka paraum̐ baru surapura jāū ||
saba dukha dusaha sahāvahu mohīṃ | locana oṭa rāma jani hoṃhī ||
5 श्लोक · 45 में से 326
दशरथ मन में सोचते हैं, मेरा अपयश हो, सुयश नष्ट हो, स्वर्ग के बदले नरक मिले, सारे असह्य दुःख सहने पड़ें, पर राम आँखों से ओझल न हों। यह सब गुनते हुए वे बोलते नहीं, और उनका मन पीपल के पत्ते की तरह डोलता है। श्रीराम ने जाना कि पिता प्रेम के वश हैं और अनुमान किया कि माता फिर कुछ कहेंगी। देश, काल और अवसर विचारकर उन्होंने विनीत वचन कहे। पिताजी, ढिठाई को बालकपन जानकर क्षमा करें। बहुत छोटी सी बात के लिए आपने दुःख पाया, किसी ने मुझे पहले बताया नहीं। माता से पूछकर प्रसंग सुना तो मेरा मन शीतल हो गया। यह मंगल का समय है, स्नेह के बल से शोक छोड़िए और प्रसन्न मन से आज्ञा दीजिए। यह कहते हुए प्रभु पुलकित हो उठे।
अजस होउ जग सुजस नसाऊ । नरक परउँ बरु सुरपुर जाऊ ॥
सब दुख दुसह सहावहु मोहीं । लोचन ओट राम जनि होंही ॥
ajasa hou jaga sujasa nasāū | naraka paraum̐ baru surapura jāū ||
saba dukha dusaha sahāvahu mohīṃ | locana oṭa rāma jani hoṃhī ||
अस मन गुनइ राउ नहिँ बोली । पीपर पात सरिस मन डोला ॥
रघुपति पितहि प्रेम-बस जानी । पुनि कछु कहिहि मातु अनुमानी ॥
asa mana gunai rāu nahim̐ bolī | pīpara pāta sarisa mana ḍolā ||
raghupati pitahi prema-basa jānī | puni kachu kahihi mātu anumānī ||
देस काल अवसर अनुसारी । बोले बचन बिनीत बिचारी ॥
तात कहउँ कछु करउँ ढिठाई । अनुचित छमब जानि लरिकाई ॥
desa kāla avasara anusārī | bole bacana binīta bicārī ||
tāta kahaum̐ kachu karaum̐ ḍhiṭhāī | anucita chamaba jāni larikāī ||
अति लघु बात लागि दुख पावा । काहु न मोहि कहि प्रथम जनावा ॥
देखि गोसाइँहि पूँछिउँ माता । सुनि प्रसङ्ग भये सीतल गाता ॥
ati laghu bāta lāgi dukha pāvā | kāhu na mohi kahi prathama janāvā ||
dekhi gosāim̐hi pūm̐chium̐ mātā | suni prasaṅga bhaye sītala gātā ||
मङ्गल समय सनेह-बल, सोच परिहरिअ तात ।
आयसु देइअ हरषि हियँ, कहि पुलके प्रभु गात ॥
maṅgala samaya saneha-bala, soca pariharia tāta |
āyasu deia haraṣi hiyam̐, kahi pulake prabhu gāta ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0