अयोध्याकाण्ड

अध्याय 46: श्रीराम विदा हुए, अयोध्या में समाचार फैला

5 श्लोक · 46 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम विदा हुए, अयोध्या में समाचार फैला

श्रीराम पिता से कहते हैं कि उसी का जन्म धन्य है जिसके आचरण से पिता प्रसन्न हों, और जिसे माता पिता प्राणों के समान प्रिय हैं उसकी हथेली में चारों पदार्थ हैं। आज्ञा का पालन कर वे जन्म का फल पाएँगे और शीघ्र लौटेंगे। माता से विदा माँगकर आएँगे, फिर चरण छूकर वन को चलेंगे। यह कहकर वे चल दिए, और शोक में डूबे राजा ने उत्तर नहीं दिया। यह तीखी बात नगर में ऐसे फैली जैसे बिच्छू का डंक छूते ही सारे शरीर में चढ़ जाता है। सब नर नारी ऐसे व्याकुल हुए जैसे दावानल देखकर बेलें और वृक्ष। जो जहाँ सुनता, वहीं सिर धुनता। मुख सूख गए, आँसू बहने लगे, मानो करुण रस की सेना डंका बजाकर अवध में उतर आई हो।

46.1

धन्य जनम जगतीतल तासू । पितहि प्रमोद चरित सुनि जासू ॥
चारि पदारथ करतल ता के । प्रिय पितु-मातु प्रान सम जा के ॥

dhanya janama jagatītala tāsū | pitahi pramoda carita suni jāsū ||
cāri padāratha karatala tā ke | priya pitu-mātu prāna sama jā ke ||

46.2

आयसु पालि जनम-फल पाई । ऐहउँ बेगिहिं, होउ रजाई ॥
बिदा मातु सन आवउँ मागी । चलिहउँ बनहिँ बहुरि पग लागी ॥

āyasu pāli janama-phala pāī | aihaum̐ begihiṃ, hou rajāī ||
bidā mātu sana āvaum̐ māgī | calihaum̐ banahim̐ bahuri paga lāgī ||

46.3

अस कहि राम गवन तब कीन्हा । भूप सोक-बस उत्तर न दीन्हा ॥
नगर व्यापि गइ बात सुतीछी । छुअत चढ़ी जनु, सब तन बीछी ॥

asa kahi rāma gavana taba kīnhā | bhūpa soka-basa uttara na dīnhā ||
nagara vyāpi gai bāta sutīchī | chuata car̤hī janu, saba tana bīchī ||

46.4

सुनि भये बिकल सकल नर नारी । बेलि बिटप जिमि देखि दवारी ॥
जो जहँ सुनइ धुनइ सिर सोई । बड़ बिषाद नहिँ धीरज होई ॥

suni bhaye bikala sakala nara nārī | beli biṭapa jimi dekhi davārī ||
jo jaham̐ sunai dhunai sira soī | bar̤a biṣāda nahim̐ dhīraja hoī ||

दो॰ 46दोहा

सुख सुखाहिँ लोचन स्त्रवहि, सोकु न हृदयँ समाइ ।
मनहुँ करुन-रस-कटकई, उतरी अवध बजाइ ॥

sukha sukhāhim̐ locana stravahi, soku na hṛdayam̐ samāi |
manahum̐ karuna-rasa-kaṭakaī, utarī avadha bajāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0