अयोध्याकाण्ड

अध्याय 44: दशरथ का आलिंगन और शिव से प्रार्थना

5 श्लोक · 44 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

दशरथ का आलिंगन और शिव से प्रार्थना

श्रीराम के आने की बात सुनकर दशरथ ने धैर्य धरकर आँखें खोलीं। मन्त्री ने उन्हें सँभालकर बैठाया और राजा ने राम को चरणों में प्रणाम करते देखा। प्रेम से विह्वल होकर उन्होंने पुत्र को हृदय से लगा लिया, मानो सर्प ने खोई हुई मणि फिर पा ली हो। राम को निहारते हुए आँखों से आँसुओं की धारा बहती रही। शोक के कारण वे कुछ कह न सके, बार बार हृदय से लगाते रहे। मन ही मन विधाता से मनाते रहे कि राम वन न जाएँ। फिर महेश का स्मरण कर बोले, हे सदाशिव, विनती सुनिए; आप आशुतोष और अवढरदानी हैं, इस दीन का दुःख हरिए। आप सबके हृदय के प्रेरक हैं, राम को ऐसी बुद्धि दीजिए कि वे मेरा वचन, शील और स्नेह छोड़कर घर ही रहें।

44.1

अवनिप अकनि रामु पगु धारे । धरि धीरज तब नयन उघारे ॥
सचिवँ सँभारि राउ बैठारे । चरन परत नृप राम निहारे ॥

avanipa akani rāmu pagu dhāre | dhari dhīraja taba nayana ughāre ||
sacivam̐ sam̐bhāri rāu baiṭhāre | carana parata nṛpa rāma nihāre ||

44.2

लिये सनेह बिकल उर लाई । गङ् मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई ॥
रामहिँ चितइ रहेउ नर नाहू । चला बिलोचन वारि प्रबाहू ॥

liye saneha bikala ura lāī | gaṅ mani manahum̐ phanika phiri pāī ||
rāmahim̐ citai raheu nara nāhū | calā bilocana vāri prabāhū ||

44.3

सोक बिबस कछु कहइ न पारा । हृदयँ लगावत बारहिँ बारा ॥
विधिहि मनाव राउ मन माहीं । जेहिं रघुनाथ न कानन जाहीं ॥

soka bibasa kachu kahai na pārā | hṛdayam̐ lagāvata bārahim̐ bārā ||
vidhihi manāva rāu mana māhīṃ | jehiṃ raghunātha na kānana jāhīṃ ||

44.4

सुमिरि महेसहि कहइ बहोरी । बिनती सुनहु सदासिव मोरी ॥
आसुतोष तुम्ह अवढर-दानी । आरति हरहु दीन जन जानी ॥

sumiri mahesahi kahai bahorī | binatī sunahu sadāsiva morī ||
āsutoṣa tumha avaḍhara-dānī | ārati harahu dīna jana jānī ||

दो॰ 44दोहा

तुम्ह प्रेरक सब के हृदयँ, सो मति रामहि देहु ।
बचन मोर तजि रहहिँ घर, परिहरि सील सनेहु ॥

tumha preraka saba ke hṛdayam̐, so mati rāmahi dehu |
bacana mora taji rahahim̐ ghara, parihari sīla sanehu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0