जिऐ मीन बरू बारि बिहीना । मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना ॥
कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीँ । जीवन मोर राम बिनु नाहीं ॥
jiai mīna barū bāri bihīnā | mani binu phaniku jiai dukha dīnā ||
kahaum̐ subhāu na chalu mana māhīm̐ | jīvana mora rāma binu nāhīṃ ||
5 श्लोक · 33 में से 326
राजा बोले, मछली भले जल के बिना जी ले, साँप मणि के बिना दुःखी होकर जी ले, पर मैं सहज भाव से, बिना छल के कहता हूँ कि मेरा जीवन श्रीराम के बिना नहीं है। मेरा जीवन श्रीराम के दर्शन के अधीन है। ये कोमल वचन सुनकर कुमति ऐसे जली मानो आग में घी की आहुति पड़ी हो। बोली, करोड़ों उपाय क्यों न करो, यहाँ आपकी माया नहीं चलेगी। या दीजिए, या ना करके अपयश लीजिए। श्रीराम साधु हैं, आप सयाने साधु हैं, और श्रीराम की माता भी भली हैं, मैंने सबको पहचान लिया। जैसा कौसल्या ने मेरा भला चाहा, वैसा ही फल उन्हें चुकाकर दूँगी। यदि सवेरा होते ही श्रीराम मुनिवेश धरकर वन न गए, तो राजन, मन में समझ लीजिए कि मेरी मृत्यु और आपका अपयश होगा।
जिऐ मीन बरू बारि बिहीना । मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना ॥
कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीँ । जीवन मोर राम बिनु नाहीं ॥
jiai mīna barū bāri bihīnā | mani binu phaniku jiai dukha dīnā ||
kahaum̐ subhāu na chalu mana māhīm̐ | jīvana mora rāma binu nāhīṃ ||
समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना । जीवन राम-दरस आधीना ॥
सुनि म्रदु बचन कुमति अति जरई । मनहुँ अनल आहुति घृत परई ॥
samujhi dekhu jiyam̐ priyā prabīnā | jīvana rāma-darasa ādhīnā ||
suni mradu bacana kumati ati jaraī | manahum̐ anala āhuti ghṛta paraī ||
कहइ करहु किन कोटि उपाया । इहाँ न लागिहि राउरि माया ॥
देहु कि लेहु अजस करि नाहीँ । मोहि न बहुत प्रपञ्च सोहाहीं ॥
kahai karahu kina koṭi upāyā | ihām̐ na lāgihi rāuri māyā ||
dehu ki lehu ajasa kari nāhīm̐ | mohi na bahuta prapañca sohāhīṃ ||
राम-साधु तुम्ह साधु सयाने । राम-मातु भलि सब पहिचाने ॥
जस कौसिलाँ मोर भल ताका । तस फल उन्हहि देउँ करि साका ॥
rāma-sādhu tumha sādhu sayāne | rāma-mātu bhali saba pahicāne ||
jasa kausilām̐ mora bhala tākā | tasa phala unhahi deum̐ kari sākā ||
होत प्रात मुनि बेष धरि, जौँ न राम बन जाहिँ ।
मोर मरन राउर अजस, नृप समुझिअ मन माहिँ ॥
hota prāta muni beṣa dhari, jaum̐ na rāma bana jāhim̐ |
mora marana rāura ajasa, nṛpa samujhia mana māhim̐ ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0