राम सपथ सत कहउँ सुभाऊ । राम-मातु कछु कहेउ न काऊ ॥
मैं सब कीन्ह तोहि बिनु पूछे । तेहि तेँ परेउ मनोरथ छूछें ॥
rāma sapatha sata kahaum̐ subhāū | rāma-mātu kachu kaheu na kāū ||
maiṃ saba kīnha tohi binu pūche | tehi tem̐ pareu manoratha chūcheṃ ||
5 श्लोक · 32 में से 326
राजा बोले, श्रीराम की सौ शपथ खाकर सच कहता हूँ, श्रीराम की माता ने कभी कुछ नहीं कहा। मैंने सब तुमसे बिना पूछे किया, इसीलिए मनोरथ खाली रह गया। अब क्रोध छोड़कर मंगल साज सजाओ, कुछ दिनों में भरत युवराज होंगे। मुझे एक ही बात का दुःख है कि तुमने दूसरा वर बड़ा असमंजस भरा माँगा। अब भी हृदय उसकी आँच से जल रहा है। यह क्रोध है, हँसी है, या सचमुच सच है? क्रोध छोड़कर श्रीराम का अपराध बताओ। सब कहते हैं कि श्रीराम बड़े साधु हैं, तुम भी उनकी सराहना करती और स्नेह करती थीं, अब सुनकर सन्देह हुआ। जिसका स्वभाव शत्रु को भी अनुकूल है, वह माता के प्रतिकूल कैसे करेगा? प्रिये, हँसी और क्रोध छोड़कर विवेक से माँगो, जिससे मैं नेत्र भरकर भरत का राज्याभिषेक देखूँ।
राम सपथ सत कहउँ सुभाऊ । राम-मातु कछु कहेउ न काऊ ॥
मैं सब कीन्ह तोहि बिनु पूछे । तेहि तेँ परेउ मनोरथ छूछें ॥
rāma sapatha sata kahaum̐ subhāū | rāma-mātu kachu kaheu na kāū ||
maiṃ saba kīnha tohi binu pūche | tehi tem̐ pareu manoratha chūcheṃ ||
रिस परिहरू अब मङ्गल साजू । कछु दिन गये भरत जुबराजू ॥
एकहि बात मोहि दुख लागा । बर दूसर असमञ्जस माँगा ॥
risa pariharū aba maṅgala sājū | kachu dina gaye bharata jubarājū ||
ekahi bāta mohi dukha lāgā | bara dūsara asamañjasa mām̐gā ||
अजहूँ हृदय जरत तेहि आँचा । रिस परिहास कि साँचेहु साँचा ॥
कहु तजि रोष राम अपराधू । सब कोउ कहइ राम सुठि साधू ॥
ajahūm̐ hṛdaya jarata tehi ām̐cā | risa parihāsa ki sām̐cehu sām̐cā ||
kahu taji roṣa rāma aparādhū | saba kou kahai rāma suṭhi sādhū ||
तुहूँ सराहसि करसि सनेहू । अब सुनि मोहि भयउ सन्देहू ॥
जासु सुभाउ अरिहि अनुकूला । सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला ॥
tuhūm̐ sarāhasi karasi sanehū | aba suni mohi bhayau sandehū ||
jāsu subhāu arihi anukūlā | so kimi karihi mātu pratikūlā ||
प्रिया हास रिस परिहरहि, माँगु बिचारि बिबेक ।
जेहिं देखउँ अब नयन भरि, भरत राज-अभिषेक ॥
priyā hāsa risa pariharahi, mām̐gu bicāri bibeka |
jehiṃ dekhaum̐ aba nayana bhari, bharata rāja-abhiṣeka ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0