राम-मातु गुरु-पद सिरु नाई । प्रभु-पद पीठ रजायसु पाई ॥
नंदिगावँ करि परन-कुटीरा । कीन्ह निवास धरम-धुर-धीरा ॥
rāma-mātu guru-pada siru nāī | prabhu-pada pīṭha rajāyasu pāī ||
naṃdigāvam̐ kari parana-kuṭīrā | kīnha nivāsa dharama-dhura-dhīrā ||
5 श्लोक · 324 में से 326
राम की माता और गुरु के चरणों में सिर नवाकर और प्रभु की पादुकाओं की आज्ञा लेकर धर्मधुरन्धर, धीर भरत ने नन्दिग्राम में पर्णकुटी बनाकर निवास किया। सिर पर जटाजूट और मुनियों का वेष धारण किया, धरती खोदकर कुश की साथरी बिछाई। वे प्रेम से ऋषियों का कठिन धर्म निभाते हैं। भूषण, भोजन, भोग और सारे सुख उन्होंने मन, तन और वचन से तिनका तोड़कर त्याग दिए। अवध के राज्य की देवराज भी सिहाते हैं, दशरथ का धन सुनकर कुबेर लजाता है, पर उस नगर में भरत बिना राग के ऐसे रहते हैं जैसे चम्पा के बाग में भौंरा। राम प्रेम के पात्र भरत इस करनी से बड़े नहीं; चातक और हंस अपनी टेक और विवेक के वैभव से सराहे जाते हैं।
राम-मातु गुरु-पद सिरु नाई । प्रभु-पद पीठ रजायसु पाई ॥
नंदिगावँ करि परन-कुटीरा । कीन्ह निवास धरम-धुर-धीरा ॥
rāma-mātu guru-pada siru nāī | prabhu-pada pīṭha rajāyasu pāī ||
naṃdigāvam̐ kari parana-kuṭīrā | kīnha nivāsa dharama-dhura-dhīrā ||
जटाजूट सिर मुनि-पद धारी । महि खनि कुस साँथरी सँवारी ॥
असन बसन बासन ब्रत नेमा । करत कठिन रिषि-धरम सप्रेमा ॥
jaṭājūṭa sira muni-pada dhārī | mahi khani kusa sām̐tharī sam̐vārī ||
asana basana bāsana brata nemā | karata kaṭhina riṣi-dharama sapremā ||
भूषन असन भोग सुख-भूरी । मन तन बचन तजे तिन तूरी ॥
अवध राजु सुर राजु सिहाई । दसरथ धनु सुनि धनद लजाई ॥
bhūṣana asana bhoga sukha-bhūrī | mana tana bacana taje tina tūrī ||
avadha rāju sura rāju sihāī | dasaratha dhanu suni dhanada lajāī ||
तेहिं पुर बसत भरत बिनु रागा । चंचरीक जिमि चम्पक-बागा ॥
रमा-बिलास राम-अनुरागी । तजत बमन जिमि जन बड़भागी ॥
tehiṃ pura basata bharata binu rāgā | caṃcarīka jimi campaka-bāgā ||
ramā-bilāsa rāma-anurāgī | tajata bamana jimi jana bar̤abhāgī ||
राम पेम भाजन भरत, बड़े न एहिं करतूति ।
चातक हंस सराहिअत, टेंक विवेक बिभूति ॥
rāma pema bhājana bharata, bar̤e na ehiṃ karatūti |
cātaka haṃsa sarāhiata, ṭeṃka viveka bibhūti ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0