अयोध्याकाण्ड

अध्याय 323: अयोध्या के सिंहासन पर पादुकाएँ विराजीं

5 श्लोक · 323 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

अयोध्या के सिंहासन पर पादुकाएँ विराजीं

भरत ने मन्त्रियों और अच्छे सेवकों को समझाया, और वे सीख पा पाकर अपने अपने काम में लग गए। फिर छोटे भाई को बुलाकर सीख दी और सब माताओं की सेवा उन्हें सौंप दी। ब्राह्मणों को बुलाकर भरत ने हाथ जोड़े, प्रणाम करके विनती की: ऊँचा नीचा, भला बुरा, जो भी काम हो, देव, आज्ञा देने में संकोच न कीजिए। फिर भाई सहित गुरु के घर गए और दण्डवत करके हाथ जोड़कर बोले, आज्ञा हो तो नियम से रहूँ। मुनि पुलकित होकर प्रेम से बोले, तुम जो समझोगे, कहोगे और करोगे, वही जगत में धर्म का सार होगा। यह सीख और बड़ा आशीर्वाद पाकर भरत ने ज्योतिषियों को बुलाकर दिन शोधा और बिना आडम्बर प्रभु की पादुकाओं को सिंहासन पर विराजमान किया।

323.1

सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे । निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे ॥
पुनि सिख दोन्हि बोलि लघु भाई । सौंपी सकल मातु सेवकाई ॥

saciva susevaka bharata prabodhe | nija nija kāja pāi pāi sikha odhe ||
puni sikha donhi boli laghu bhāī | sauṃpī sakala mātu sevakāī ||

323.2

भूसुर बोलि भरत कर जोरे । करि प्रनाम बर बिनय निहोरे ॥
ऊँच नीच कारज भल पोचू । आयसु देव न करब सँकोचू ॥

bhūsura boli bharata kara jore | kari pranāma bara binaya nihore ||
ūm̐ca nīca kāraja bhala pocū | āyasu deva na karaba sam̐kocū ||

323.3

परिजन पुरजन प्रजा बोलाये । समाधान करि सुबस बसाए ॥
सानुज गे गुरु-गेहँ बहोरी । करि दंडवत कहत कर जोरी ॥

parijana purajana prajā bolāye | samādhāna kari subasa basāe ||
sānuja ge guru-geham̐ bahorī | kari daṃḍavata kahata kara jorī ||

323.4

आयसु होइ त रहउँ सनेमा । बोले मुनि तन पुलकि सपेमा ॥
समुझव कहब करब तुम्ह जोई । धरम-सार जग होइहि सोई ॥

āyasu hoi ta rahaum̐ sanemā | bole muni tana pulaki sapemā ||
samujhava kahaba karaba tumha joī | dharama-sāra jaga hoihi soī ||

दो॰ 323दोहा

दो सुनि सिख पाइ असीस बड़ि, गनक बोलि दिन साधि ।
सिँघासन प्रभु पादुका, बैठारे निरुपाधि ॥

do suni sikha pāi asīsa bar̤i, ganaka boli dina sādhi |
sim̐ghāsana prabhu pādukā, baiṭhāre nirupādhi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0