बिदा कीन्ह सनमानि निषादू । चलेउ हृदयँ बड़ बिरह बिषादू ॥
कोल किरात भिल्ल बनचारी । फेरे फिरे जोहारि जोहारी ॥
bidā kīnha sanamāni niṣādū | caleu hṛdayam̐ bar̤a biraha biṣādū ||
kola kirāta bhilla banacārī | phere phire johāri johārī ||
5 श्लोक · 321 में से 326
राम ने निषाद को सम्मान सहित विदा किया; वह हृदय में बड़े विरह और विषाद के साथ चला। प्रभु, सीता और लक्ष्मण वट की छाया में बैठकर प्रिय परिजनों के वियोग में बिलखते हैं। प्रेमवश राम अपने श्रीमुख से प्रिया और छोटे भाई से भरत के स्नेह, स्वभाव और सुन्दर वाणी का बखान करते हैं। उस समय पक्षी, मृग, जल के जीव और चित्रकूट के सब जड़ चेतन उदास हो गए। रघुबर की दशा देखकर देवताओं ने फूल बरसाए और अपने घर घर की दशा कही; प्रभु ने भरोसा दिया और वे प्रसन्न होकर चले गए। भाई और सीता सहित प्रभु पर्णकुटी में ऐसे शोभित हैं मानो भक्ति, ज्ञान और वैराग्य शरीर धारण करके सोह रहे हों।
बिदा कीन्ह सनमानि निषादू । चलेउ हृदयँ बड़ बिरह बिषादू ॥
कोल किरात भिल्ल बनचारी । फेरे फिरे जोहारि जोहारी ॥
bidā kīnha sanamāni niṣādū | caleu hṛdayam̐ bar̤a biraha biṣādū ||
kola kirāta bhilla banacārī | phere phire johāri johārī ||
प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं । प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं ॥
भरत सनेह सुभाउ सुबानी । प्रिया अनुज सन कहत बखानी ॥
prabhu siya lakhana baiṭhi baṭa chāhīṃ | priya parijana biyoga bilakhāhīṃ ||
bharata saneha subhāu subānī | priyā anuja sana kahata bakhānī ||
प्रीति प्रतीति बचन मन करनी । श्रीमुख राम प्रेम-बस बरनी ॥
तेहि अवसर खग मृग जल-लीला । चित्रकूट चर अचर मलीना ॥
prīti pratīti bacana mana karanī | śrīmukha rāma prema-basa baranī ||
tehi avasara khaga mṛga jala-līlā | citrakūṭa cara acara malīnā ||
बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की । बरषि सुमन कहि गति घर घर की ॥
प्रभु प्रनामु करि दीन्ह भरोसो । चले मुदित मन डर न खरो सो ॥
bibudha biloki dasā raghubara kī | baraṣi sumana kahi gati ghara ghara kī ||
prabhu pranāmu kari dīnha bharoso | cale mudita mana ḍara na kharo so ||
सानुज सीय समेत प्रभु, राजत परन-कुटीर ।
भगति ज्ञान बैराग्य जनु, सोहत धरें सरीर ॥
sānuja sīya sameta prabhu, rājata parana-kuṭīra |
bhagati jñāna bairāgya janu, sohata dhareṃ sarīra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0