सानुज राम नृपहि सिर नाई । कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई ॥
देव दया-बस बड़ दुख पायउ । सहित समाज काननहिं आयउ ॥
sānuja rāma nṛpahi sira nāī | kīnhi bahuta bidhi binaya bar̤āī ||
deva dayā-basa bar̤a dukha pāyau | sahita samāja kānanahiṃ āyau ||
5 श्लोक · 319 में से 326
लक्ष्मण सहित राम ने राजा जनक को सिर नवाया और बहुत प्रकार विनय और बड़ाई की: देव, दयावश आपने बड़ा दुःख पाया और समाज सहित वन में आए; अब आशीर्वाद देकर नगर पधारिए। राजा ने धीरज धरकर प्रस्थान किया। मुनियों, ब्राह्मणों और साधुओं को हरि हर के समान जानकर सम्मान सहित विदा किया। दोनों भाई सासों के पास गए और चरण वन्दकर आशीर्वाद पाकर लौटे। विश्वामित्र, वामदेव, जाबालि, पुरजन, परिजन और सदाचारी मन्त्री, सबको राम लक्ष्मण ने यथायोग्य विनय और प्रणाम करके विदा किया। स्त्री पुरुष, छोटे, मध्यम और बड़े, सबको कृपानिधि ने सम्मान करके लौटाया। भरत की माता कैकेयी के चरणों की वन्दना करके प्रभु पवित्र स्नेह से उनसे मिले, उनका सारा संकोच और सोच मिटाकर उन्हें सजी हुई पालकी में विदा किया।
सानुज राम नृपहि सिर नाई । कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई ॥
देव दया-बस बड़ दुख पायउ । सहित समाज काननहिं आयउ ॥
sānuja rāma nṛpahi sira nāī | kīnhi bahuta bidhi binaya bar̤āī ||
deva dayā-basa bar̤a dukha pāyau | sahita samāja kānanahiṃ āyau ||
पुर पग धारिअ देइ असीसा । कीन्ह धीर धरि गवन महीसा ॥
मुनि महिदेव साधु सनमाने । बिदा किये हरि हर सम जाने ॥
pura paga dhāria dei asīsā | kīnha dhīra dhari gavana mahīsā ||
muni mahideva sādhu sanamāne | bidā kiye hari hara sama jāne ||
सासु समीप गये दोउ भाई । फिरे बन्दि पग आसिष पाई ॥
कौसिक बामदेव जाबाली । पुरजन परिजन सचिव सुचाली ॥
sāsu samīpa gaye dou bhāī | phire bandi paga āsiṣa pāī ||
kausika bāmadeva jābālī | purajana parijana saciva sucālī ||
जथा जोगु करि बिनय प्रनामा । बिदा किये सब सानुज रामा ॥
नारि-पुरुष लघु मध्य बड़ेरे । सब सनमानि कृपानिधि फेरे ॥
jathā jogu kari binaya pranāmā | bidā kiye saba sānuja rāmā ||
nāri-puruṣa laghu madhya bar̤ere | saba sanamāni kṛpānidhi phere ||
भरत-मातु-पद बन्दि प्रभु, सुचि सनेहँ मिलि भेंटि ।
बिदा कीन्ह सजि पालकी, सकुच सोच सब मेटि ॥
bharata-mātu-pada bandi prabhu, suci saneham̐ mili bheṃṭi |
bidā kīnha saji pālakī, sakuca soca saba meṭi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0