सो कुचालि सब कहँ भइ नीकी । अवधि आस सम जीवन जी की ॥
न तरु लखन-सिय-सम बियोगा । हहरि मरत सब लोग कुरोगा ॥
so kucāli saba kaham̐ bhai nīkī | avadhi āsa sama jīvana jī kī ||
na taru lakhana-siya-sama biyogā | hahari marata saba loga kurogā ||
5 श्लोक · 317 में से 326
इन्द्र की वह कुचाल सबके लिये भली हो गई; अवधि की आशा जीवन का जीवन बन गई। नहीं तो लक्ष्मण, सीता और राम के वियोग के कुरोग से सब लोग घबराकर मर जाते। राम की कृपा ने उलझन सुधार दी, और देवताओं का धावा गुणकारी पुकार बन गया। राम भुजाओं में भरकर भाई भरत से मिलते हैं; उस राम प्रेम रस का वर्णन नहीं हो सकता। तन, मन और वचन में अनुराग उमड़ पड़ा, धीरधुरन्धर ने धीरज छोड़ दिया और कमल नयनों से जल बहने लगा। मुनिगण, गुरु और जनक जैसे धीर, जिनके मन ज्ञान की आग में कसे सोने जैसे हैं वे भी रघुबर और भरत की अनुपम प्रीति देखकर वैराग्य और विवेक सहित मग्न हो गए।
सो कुचालि सब कहँ भइ नीकी । अवधि आस सम जीवन जी की ॥
न तरु लखन-सिय-सम बियोगा । हहरि मरत सब लोग कुरोगा ॥
so kucāli saba kaham̐ bhai nīkī | avadhi āsa sama jīvana jī kī ||
na taru lakhana-siya-sama biyogā | hahari marata saba loga kurogā ||
रामकृपाँ अवरेब सुधारी । बिबुध-धारि भइ गुनद गोहारी ॥
भेंटत भुज भरि भाइ भरत सो । राम-प्रेम-रस कहि न परत सो ॥
rāmakṛpām̐ avareba sudhārī | bibudha-dhāri bhai gunada gohārī ||
bheṃṭata bhuja bhari bhāi bharata so | rāma-prema-rasa kahi na parata so ||
तन मन बचन उमग अनुरागा । धीर-धुरन्धर धीरज त्यागा ॥
बारिज लोचन मोचत बारी । देखि दसा सुर-सभा दुखारी ॥
tana mana bacana umaga anurāgā | dhīra-dhurandhara dhīraja tyāgā ||
bārija locana mocata bārī | dekhi dasā sura-sabhā dukhārī ||
मुनिगन गुरु धुर धीर जनक से । ज्ञान-अनल मन कसें कनक से ॥
जे बिरञ्चि निरलेप उपाये । पदुम पत्र जिमि जग जल जाये ॥
munigana guru dhura dhīra janaka se | jñāna-anala mana kaseṃ kanaka se ||
je birañci niralepa upāye | paduma patra jimi jaga jala jāye ||
तेउ बिलोकि रघुबर भरत, प्रीति अनूप अपार ।
भये मगन मन तन बचन, सहित बिराग बिचार ॥
teu biloki raghubara bharata, prīti anūpa apāra |
bhaye magana mana tana bacana, sahita birāga bicāra ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0