अयोध्याकाण्ड

अध्याय 306: श्रीराम भरत से भार उठाने को कहते हैं

5 श्लोक · 306 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम भरत से भार उठाने को कहते हैं

राम कहते हैं, घर में और वन में, तुम्हारे और हमारे समाज सहित, गुरु का प्रसाद ही रखवाला है। माता, पिता, गुरु और स्वामी की आज्ञा सारे धर्म रूपी पृथ्वी को धारण करने वाले शेष के समान है। तात, वही तुम करो और मुझसे भी कराओ, और सूर्यकुल के पालक बनो। यह एक साधन कीर्ति, सुगति और ऐश्वर्य की त्रिवेणी है। यह विचारकर भारी संकट सहकर प्रजा और परिवार को सुखी करो। भाई, विपत्ति सबने बाँट ली है, पर तुम्हें अवधि भर बड़ी कठिनाई है। तुम्हें कोमल जानकर भी कठोर कहता हूँ; कुसमय में यह मेरा अनुचित नहीं। सेवक हाथ, पैर और आँखों के समान हो और स्वामी मुख के समान; तुलसी कहते हैं, प्रीति की यह रीति सुनकर सुकवि सराहते हैं।

306.1

सहित समाज तुम्हार हमारा । घर बन गुर प्रसाद रखवारा ॥
मातु पिता गुरु स्वामि निदेसू । सकल धरम धरनी-धर-सेसू ॥

sahita samāja tumhāra hamārā | ghara bana gura prasāda rakhavārā ||
mātu pitā guru svāmi nidesū | sakala dharama dharanī-dhara-sesū ||

306.2

सो तुम्ह करहु करावहु मोहू । तात तरनिकुल पालक होहू ॥
साधन एक सकल सिधि देनी । कीरति सुगति भूति-मय बेनी ॥

so tumha karahu karāvahu mohū | tāta taranikula pālaka hohū ||
sādhana eka sakala sidhi denī | kīrati sugati bhūti-maya benī ||

306.3

सो बिचारि सहि सङ्कट भारी । करहु प्रजा परिवार सुखारी ॥
बाँटी बिपति सबहिँ मोहि भाई । तुम्हहिं अवधि भरि बड़ि कठिनाई ॥

so bicāri sahi saṅkaṭa bhārī | karahu prajā parivāra sukhārī ||
bām̐ṭī bipati sabahim̐ mohi bhāī | tumhahiṃ avadhi bhari bar̤i kaṭhināī ||

306.4

जानि तुम्हहिं मृदु कहउँ कठोरा । कुसमयँ तात न अनुचित मोरा ॥
होहिं कुठायँ सुबन्धु सुहाए । ओड़िअहिं हाथ असनिहु के घाये ॥

jāni tumhahiṃ mṛdu kahaum̐ kaṭhorā | kusamayam̐ tāta na anucita morā ||
hohiṃ kuṭhāyam̐ subandhu suhāe | or̤iahiṃ hātha asanihu ke ghāye ||

दो॰ 306दोहा

सेवक कर-पद-नयन से, मुख सो साहिब होइ ।
तुलसी प्रीति कि रीति सुनि, सुकबि सराहहिं सोइ ॥

sevaka kara-pada-nayana se, mukha so sāhiba hoi |
tulasī prīti ki rīti suni, sukabi sarāhahiṃ soi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0