अयोध्याकाण्ड

अध्याय 305: श्रीराम कहते हैं, गुरु का प्रभाव सबकी रक्षा करेगा

5 श्लोक · 305 में से 326

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम कहते हैं, गुरु का प्रभाव सबकी रक्षा करेगा

राम कहते हैं, तात, तुम सूर्यकुल की रीति जानते हो: सत्यप्रतिज्ञ पिता, उनकी कीर्ति और प्रीति, समय, समाज, गुरुजनों की लाज, और उदासीन, मित्र और शत्रु के मन की बात। तुम सबके कर्म जानते हो, और अपना तथा मेरा परम हितकारी धर्म भी। मुझे सब प्रकार तुम्हारा भरोसा है, फिर भी अवसर के अनुसार कहता हूँ। तात, पिता के बिना हमारी बात केवल गुरुकुल की कृपा ने सँभाली है, नहीं तो प्रजा, पुरजन, परिवार और हम सब बरबाद हो जाते। यदि बिना समय सूर्य अस्त हो जाए, तो कहो, जगत में किसे क्लेश न होगा? हे तात, विधाता ने वैसा ही उत्पात किया, पर मुनि और मिथिलेश ने सबको बचा लिया। राजकाज, सब लाज, प्रतिष्ठा, धर्म, धरती, धन और घर, गुरु का प्रभाव सबकी रक्षा करेगा और परिणाम भला होगा।

305.1

जानहु तात तरनि-कुल रीती । सत्यसन्ध पितु कीरति प्रीती ॥
समउ समाज लाज गुरुजन की । उदासीन हित अनहित मन की ॥

jānahu tāta tarani-kula rītī | satyasandha pitu kīrati prītī ||
samau samāja lāja gurujana kī | udāsīna hita anahita mana kī ||

305.2

तुम्हहिं बिदित सबही कर करमू । आपन मोर परम-हित धरमू ॥
मोहि सब भाँति भरोस तुम्हारा । तदपि कहउँ अवसर अनुसारा ॥

tumhahiṃ bidita sabahī kara karamū | āpana mora parama-hita dharamū ||
mohi saba bhām̐ti bharosa tumhārā | tadapi kahaum̐ avasara anusārā ||

305.3

तात तात बिनु बात हमारी । केवल गुरु-कुल-कृपाँ सँभारी ॥
नतरु प्रजा पुरजन परिवारू । हमहिँ सहित सब होत खुआरू ॥

tāta tāta binu bāta hamārī | kevala guru-kula-kṛpām̐ sam̐bhārī ||
nataru prajā purajana parivārū | hamahim̐ sahita saba hota khuārū ||

305.4

जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू । जग केहि कहहु न होइ कलेसू ॥
तस उतपात तात बिधि कीन्हा । मुनि मिथिलेस राखि सब लीन्हा ॥

jauṃ binu avasara athavam̐ dinesū | jaga kehi kahahu na hoi kalesū ||
tasa utapāta tāta bidhi kīnhā | muni mithilesa rākhi saba līnhā ||

दो॰ 305दोहा

राज काज सब लाज पति, धरम धरनि धन धाम ।
गुरु प्रभाउ पालिहि सबहि, भल होइहि परिनाम ॥

rāja kāja saba lāja pati, dharama dharani dhana dhāma |
guru prabhāu pālihi sabahi, bhala hoihi parināma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0